भोपाल। देश में लागू किए जा रहे नए श्रम कानूनों और अन्य मुद्दों को लेकर केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश के भोपाल, जबलपुर, इटारसी सहित कई शहरों में कर्मचारियों ने सांकेतिक हड़ताल कर अपनी नाराजगी जाहिर की। हालांकि कई स्थानों पर प्रदर्शन सीमित समय के लिए रहा और कर्मचारी कुछ घंटों बाद वापस अपने कार्यस्थलों पर लौट गए। इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार तक अपनी मांगों और चिंताओं को पहुंचाना था।
जबलपुर और इटारसी में रक्षा उत्पादन से जुड़ी फैक्टरियों के बाहर कर्मचारियों ने एकत्र होकर नारेबाजी की और नए श्रम कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शित किया। ग्वालियर में ट्रेड यूनियन की हड़ताल के कारण पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की कुछ शाखाएं बंद रहीं, जबकि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) व अन्य निजी बैंकों में लोग काम करते दिखाई दिए। पीएनबी की कुछ शाखाएं बंद होने से स्थानीय लोग परेशान होते दिखाई दिए।
इटारसी से मिली खबर के अनुसार कर्मचारियों ने करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया, जिसके बाद वे काम पर लौट गए। इस हड़ताल में विभिन्न ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चे ने भाग लिया। इसमें आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा सहित बैंक, बीमा, केंद्रीय कर्मचारी और बीएसएनएल से जुड़े संगठन शामिल रहे। मध्यप्रदेश बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के अनुसार, सरकारी बैंकों के साथ कुछ निजी बैंक कर्मचारियों ने भी हड़ताल का समर्थन किया।
हालांकि भारतीय स्टेट बैंक की यूनियन ने समर्थन तो दिया, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से हड़ताल में हिस्सा नहीं लिया। जबकि, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के कर्मचारियों ने विरोध में जमकर भागीदारी की। बीएसएनएल और डाक विभाग में भी कार्य प्रभावित होने की खबरें हैं। संगठनों की मुख्य मांगों में चारों श्रम संहिताओं को रद्द करना प्रमुख है। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि नए कानूनों से कर्मचारियों के अधिकार कमजोर हो सकते हैं।
कर्मचारियों ने इसके अलावा, ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और शांति एक्ट (न्यूक्लियर एनर्जी से संबंधित कानून) को वापस लेने की मांग भी उठाई। मनरेगा की बहाली और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन अधिनियम 2025 को रद्द करने की मांग भी प्रमुख रही। कुल मिलाकर इस हड़ताल के माध्यम से श्रमिक संगठनों ने अपनी असहमति दर्ज कराने का एक संगठित प्रयास किया। हालांकि प्रदर्शन अधिकतर सांकेतिक रहे।
