खंडवा। जिले के जनजातीय कार्य विभाग में हुए कथित तबादला घोटाले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। इस मामले में हॉस्टल अधीक्षक हेमंत सिन्हा को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि उन्होंने रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर संतोष शुक्ला के लिए बिचौलिये की भूमिका निभाई और ट्रांसफर-पोस्टिंग के बदले लेनदेन कराया। इस कार्रवाई से विभाग में हलचल मच गई है।
तबादलों में अनियमितता के आरोप
विभाग में बड़ी संख्या में तबादले किए गए थे, जिनमें जमकर नियमों की अनदेखी की गई। बताया जाता है कि इन तबादलों के लिए कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों से आर्थिक लेनदेन किया गया। इसी सिलसिले में हॉस्टल अधीक्षक की भूमिका संदिग्ध पाई गई। मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया। प्रभारी मंत्री ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए सभी संदिग्ध ट्रांसफर और पोस्टिंग आदेशों को निरस्त करवा दिया।

निलंबन आदेश तुरंत किया गया लागू
प्रशासन का कहना है कि आरोपी अधिकारी अपने पद पर बने रहते तो जांच प्रभावित हो सकती थी। इसी कारण प्रभारी असिस्टेंट कमिश्नर बजरंग बहादुर ने छुट्टी के दिन कार्यालय खोलकर निलंबन आदेश जारी किया। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कि जांच बिना किसी दबाव के आगे बढ़ सके। रविवार अवकाश होता है, प्रशासन ने विशेष रूप से कार्यालय खोलकर सबसे पहले संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन आदेश जारी किया।
विभाग में आगे और कार्रवाई संभव
यह कार्रवाई प्रभारी असिस्टेंट कमिश्नर द्वारा की गई, जिससे मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस घटना के बाद विभाग में सतर्कता बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।









