मध्यप्रदेश। इंदौर के भागीरथपुरा में हुए दूषित जलकांड का मुद्दा सदन में तीखी बहस का कारण बना। एक से डेढ़ घंटे चली बहस में विपक्ष ने सरकार से कई तीखे सवाल किए। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा भागीरथपुरा के लोगों को अशिक्षित कहे जाने को लेकर विपक्ष के कई नेताओं ने विरोध किया। इतना ही नहीं अब सरकार ने सदन में 32 लोगों की मौत होने की बात भी स्वीकार कर ली है।
सरकार चर्चा से भाग रही
नेता विपक्ष उमंग सिंघार ने सदन से बाहर आकर कहा कि, 'शुद्ध पानी मांगना राजनीति नहीं, जनता का अधिकार है। सरकार चर्चा से भाग रही है, कोर्ट का बहाना बना रही है। जबलपुर में काला पानी, कई शहरों में दूषित पानी, प्रमाण सदन में दिए गए। भागीरथपुरा में मौतों के आंकड़ों में भी सरकार का झूठ उजागर हुआ है। गरीब व्यक्ति RO पानी नहीं खरीद सकता क्या उसे ज़हर पीने के लिए छोड़ दिया जाए? प्रदेश की जनता को “काला पानी” पिलाना शर्मनाक है। दोषियों की जवाबदेही तय हो, पीड़ितों को न्याय मिले यही विपक्ष के रूप में जनता की मांग है।'
परिशिष्ट में 32 मृत लोगों के नाम
सदन में कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि, यह नैतिकता से जुड़ा मामला है। जब भी पुरस्कार की बात आती है तो नित्य सामने आ जाते हैं लेकिन जब जिम्मेदारी तय करने की बात आती है तो अधिकारियों को आगे कर दिया जाता है। आज ही मंत्री (कैलाश विजयवर्गीय) से पूछा कि, भागीरथपुरा में कितनी मौत हुई तो जवाब के पहले पेज पर 20 का आंकड़ा लिखा लेकिन परिशिष्ट में 32 मृत लोगों के नाम हैं। इस तरह पहले पेज पर 20 लोगों की मौत का आंकड़ा देना गलत है और इस पर चर्चा होनी चाहिए कि, सही आंकड़ा क्यों नहीं दिया जा रहा।
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कई बार स्थगित की गई कार्रवाई
गुरुवार को बजट सत्र का पांचवां दिन है। कांग्रेस विधायक और नेता विपक्ष बार-बार भागीरथपुरा मामले में चर्चा की मांग कर रहे थे। इसके चलते कई बार विधानसभा में कार्रवाई को स्थगित करना पड़ा।










