सिविल सेवा दिवस के अवसर पर मंत्री चैतन्य कश्यप ने पूर्व मुख्य सचिव सुशील चंद्र वर्मा की ईमानदारी की मिसाल साझा की। उन्होंने बताया कि वर्मा ने चुनाव के दौरान मिले 11,000 रुपये में से खर्च का हिसाब देकर 2,700 रुपये वापस कर दिए। यह घटना प्रशासनिक पारदर्शिता और नैतिकता का बेहतरीन उदाहरण है।

भोपाल। सिविल सेवा दिवस के मौके पर एक प्रेरणादायक घटना सामने आई। पूर्व मुख्य सचिव सुशील चंद्र वर्मा ने, जो बाद में सांसद भी बने, अपनी ईमानदारी का उदाहरण पेश किया था। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कश्यप ने इस घटना का जिक्र सिविल सेवा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में किया। उन्होंने बताया कि वर्मा ने चुनाव के दौरान मिले 11,000 रुपए के चंदे में से 2,700 रुपए वापस कर दिए थे। यह राशि कश्यप ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए शुभकामना स्वरूप दी थी। इस घटना को उन्होंने प्रशासनिक नैतिकता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

हिसाब देकर लौटाए बाकी बचे पैसे 
चैतन्य कश्यप के अनुसार, जब वे वर्मा से मिलने उनके घर पहुंचे, तो वर्मा ने अपने सहायक को बुलाकर 2,700 रुपए वापस दिलवाए। साथ ही उन्होंने एक कागज पर चुनाव खर्च का पूरा विवरण भी दिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने केवल जरूरत के अनुसार ही राशि खर्च की थी। कश्यप ने कहा कि आज के समय में इस तरह की पारदर्शिता कम देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सच्चाई अब दुर्लभ होती जा रही है। यह घटना प्रशासनिक सेवा में ईमानदारी की मिसाल के रूप में देखी जाती है।

अनुराग जैन ने कहा अंधानुकरण न करें  
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अधिकारियों को केवल नियमों का अंधानुकरण न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि निर्णय लेते समय आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जो नियम अप्रासंगिक हो गए हैं, उन्हें बदलना चाहिए। ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो। जैन ने अधिकारियों से नीति निर्माण में शॉर्टकट से बचने को भी कहा। उन्होंने सिविल सेवा दिवस को सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

नवाचार और जिम्मेदारी पर हुई चर्चा 
चैतन्य कश्यप ने कहा कि नवाचार तभी सफल होते हैं, जब उन्हें लंबे समय तक जारी रखा जाए। उन्होंने बताया कि अक्सर अधिकारी कुछ दिनों तक उत्साह के साथ अभियान चलाते हैं। लेकिन लंबे समय तक उसे जारी रखना एक बड़ी चुनौती बन जाती है। उन्होंने अधिकारियों से निरंतरता बनाए रखने पर जोर दिया। कार्यक्रम में प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को अपने कार्य में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखने की सलाह दी गई। इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।