भोपाल। नगर निगम में कथित तौर पर फर्जी बिलों के माध्यम से करोड़ों रुपए के भुगतान का मामला सामने आया है। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में नगर निगम के अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर पाया गया, जिसके आधार पर अदालत से सर्च वारंट लेकर नगर निगम के विभिन्न कार्यालयों में छापेमारी की गई।
फर्जी बिलों से कराया करोड़ों का भुगतान
यह शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त कार्यालय तक पहुंची थी। आरोप था कि नगर निगम में कुछ कर्मचारियों ने मिलकर बिना किसी वास्तविक काम के फर्जी बिल तैयार कराकर करोड़ों रुपए का भुगतान करा दिया। जांच एजेंसी का कहना है कि बिल तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया, जिससे भुगतान की प्रक्रिया को वैध दिखाने की कोशिश की गई। इन बिलों के आधार पर कई निजी फर्मों के नाम पर भुगतान किए जाने की बात सामने आई है, जिनमें से कुछ फर्में अधिकारियों के परिचितों या रिश्तेदारों से जुड़ी बताई जा रही हैं।
लोकायुक्त ने कई विभागों में की कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस की टीम ने शुक्रवार सुबह लगभग साढ़े दस बजे नगर निगम के कई विभागों में एक साथ कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान लेखा शाखा, कंप्यूटर शाखा और डेटा सेंटर के अलावा लिंक रोड-2 स्थित मुख्य निगम कार्यालय और फतेहगढ़ क्षेत्र में स्थित पुराने कार्यालय को भी जांच के दायरे में लिया गया। अधिकारियों ने इन स्थानों से बड़ी मात्रा में दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। बताया जा रहा है कि लगभग दस वर्षों से जुड़े सर्वर डाटा को भी जब्त कर लिया गया है, ताकि पुराने भुगतान और कार्यों की जानकारी का मिलान किया जा सके।
जांच में कई विभागों में गड़बड़ियों के संकेत
प्रारंभिक जांच में मोटर वर्क शाखा, जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े कुछ भुगतान में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसी कारण जांच एजेंसी ने भुगतान प्रणाली से जुड़े एसएपी सॉफ्टवेयर का पूरा डिजिटल डेटा सुरक्षित कर लिया है। अब विशेषज्ञों की मदद से इस डेटा का विश्लेषण किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किन परियोजनाओं या कार्यों के नाम पर धनराशि जारी की गई और क्या वास्तव में उन कार्यों का निष्पादन हुआ था या नहीं। लोकायुक्त अधिकारियों ने कहा जांच के बाद घोटाले में शामिल कर्मचारियों, अधिकारियों और संबंधित फर्मों की भूमिका भी सामने आएगी।