भोपाल। राजधानी में बची शराब दुकानों के आवंटन के लिए आज टेंडर प्रक्रिया आयोजित की जा जाएगी। कुल 82 दुकानों को 34 समूहों में विभाजित किया गया है, जिनका आरक्षित मूल्य करीब 1374 करोड़ रुपए है। इच्छुक कारोबारी ई-टेंडर के माध्यम से बोली लगाएंगे। पहले ही एक समूह द्वारा 5 दुकानों के ठेके लगभग 97 करोड़ रुपए में लिए जा चुके हैं। इस बार प्रशासन ने ठेकों की संरचना में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां दुकानों को कम समूहों में बांटा जाता था, वहीं अब इन्हें अधिक समूहों में विभाजित किया गया है। इसका उद्देश्य छोटे व नए व्यापारियों को अवसर देना है।
दिनभर चलेगी प्रक्रिया, शाम तक तस्वीर साफ
पहले दो बार टेंडर प्रक्रिया अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी थी, क्योंकि कुछ बड़े समूहों का वर्चस्व बना हुआ था। इसी वजह से समूहों की संख्या बढ़ाकर प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने की कोशिश की गई। टेंडर की प्रक्रिया सुबह से शुरू होकर देर शाम तक जारी रहेगी। इसमें बोली जमा करने से लेकर उन्हें खोलने तक की सभी औपचारिकताएं शामिल हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि दिन के अंत तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन-कौन से समूह किन कारोबारियों को मिले हैं।
आरक्षित मूल्य पिछले साल से 20 फीसदी बढ़ा
पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस बार शराब दुकानों के आरक्षित मूल्य में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पहले जहां कुल ठेके करीब 1193 करोड़ रुपए में गए थे, वहीं इस बार लक्ष्य और अधिक रखा गया है। इसका असर अलग-अलग समूहों की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है, जिससे सरकार को अधिक राजस्व मिलने की संभावना है। नई व्यवस्था और बढ़ी हुई कीमतों के चलते सरकार को इस बार अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है।
नीलामी में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा पर जोर
एक मोटे अनुमान के अनुसार इस बार पिछले साल की तुलना में करीब 238 करोड़ रुपए ज्यादा राजस्व प्राप्त हो सकता है। यदि टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, तो यह आंकड़ा और भी ऊपर जा सकता है। कुल मिलाकर, भोपाल में शराब दुकानों के टेंडर की यह प्रक्रिया केवल आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नई नीति के तहत पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल सरकार की आय बढ़ेगी, बल्कि नए व्यापारियों को भी प्रवेश का अवसर मिलेगा।