भोपाल। न्यू मार्केट स्थित रोशनपुरा इलाके में ड्रेस कोड विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। लेंसकार्ट शोरूम के बाहर हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों को तिलक लगाया और कलावा बांधा। मंत्रोच्चार के साथ किए गए इस विरोध में धार्मिक भावनाओं का मुद्दा प्रमुख रहा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी की नीतियों से सनातन परंपराओं का अपमान हुआ है। उन्होंने नारे लगाते हुए कहा कि ऐसे मामलों को देश में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लेंसकार्ट के बहिष्कार की दी चेतावनी
हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख प्रदर्शित करते हुए कहा कि संगठन लेंसकार्ट के बहिष्कार की अपील कर रहा है। उनका कहना है कि भारत में तिलक, बिंदी और कलावा जैसे प्रतीकों का सम्मान जरूरी है। यदि किसी कंपनी ने इन पर रोक लगाने की कोशिश की, तो इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ता ही कंपनियों को ऊंचाई तक पहुंचाते हैं। इसलिए जरूरत पड़ने पर विरोध के जरिए उन्हें नीचे लाने की क्षमता भी जनता के पास है।
सनातन प्रतीकों का सम्मान जरूरी
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल एक कंपनी का मामला नहीं है। बल्कि यह धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय है। उन्होंने कॉरपोरेट जगत को चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता जरूरी है। महाराज अनिल आनंद ने कंपनी के सीईओ की ओर से दी गई सफाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह पुरानी गाइडलाइन थी, तो इससे कंपनी की सोच जाहिर होती है। उन्होंने कहा कि केवल माफी मांगने से मामला खत्म नहीं होता। ऐसे मामलों में गंभीरता जरूरी है।
धर्म का अपमान नहीं सहन करेंगे
प्रदर्शन के दौरान कुछ वक्ताओं ने महात्मा गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समय के साथ परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अब लोग अपनी आस्था से जुड़े मुद्दों पर अधिक मुखर हो गए हैं। उनका मानना है कि केवल सहन करने की प्रवृत्ति अब स्वीकार्य नहीं है। संत समिति ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी ऐसे मामलों पर सख्त रुख अपनाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। इस विवाद ने धर्म, व्यापार और अभिव्यक्ति के बीच संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है।









