इंदौर। मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण सुनवाई फिलहाल टल गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में इस मामले की सुनवाई सोमवार को होनी थी, पर वकीलों की हड़ताल के कारण इसे 18 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया। 18 फरवरी को होने वाली सुनवाई में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा। बता दें धार का यह ऐतिहासिक परिसर दो समुदायों के लिए आस्था का केंद्र है।
मंदिर मानते हैं हिंदू, मुसलमान मस्जिद
हिंदू पक्ष इसे देवी वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे 11वीं शताब्दी की कमाल मौला मस्जिद का नाम देता है। चूंकि यह स्मारक एएसआई द्वारा संरक्षित है, इसलिए यहां पूजा-अर्चना और नमाज को लेकर सालों से कानूनी विवाद चल रहा है। इसी विवाद के समाधान के लिए एएसआई ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था, ताकि परिसर की ऐतिहासिक और संरचनात्मक वास्तविकता स्पष्ट हो सके।
वकीलों की हड़ताल से सुनवाई टली
22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि हाई कोर्ट एएसआई की सीलबंद रिपोर्ट को खोले और संबंधित पक्षों को उसकी प्रतियां उपलब्ध कराए। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद मामला पहली बार सोमवार को हाई कोर्ट में सूचीबद्ध हुआ था। हालांकि, उस दिन वकीलों की हड़ताल के कारण इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बावजूद हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के याचिकाकर्ता स्वयं अदालत में उपस्थित हुए।
दोनों पक्षों को दी गई अगली तारीख
हिंदू पक्ष की ओर से हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस से जुड़े अशीष गोयल ने बताया कि हड़ताल के चलते सुनवाई टल गई और अब अगली तारीख 18 फरवरी तय की गई है। वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी से जुड़े अब्दुल समद भी अदालत में मौजूद रहे। मुस्लिम पक्ष की याचिका में 7 अप्रैल 2003 के एएसआई आदेश को अनुचित बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि उस आदेश का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।
मंगलवार को पूजा, शुक्रवार को नमाज
साल 2003 में एएसआई ने एक व्यवस्था लागू की थी, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार को पूजा करने की अनुमति दी गई, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई। यह व्यवस्था अब भी लागू है। एएसआई की हालिया वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट इस विवाद के तथ्यात्मक पहलुओं को स्पष्ट कर सकती है। जब रिपोर्ट खोली जाएगा और पक्षकारों को सौंपी जाएगी, तब वे उस पर आपत्तियां या जवाब दाखिल कर सकेंगे।









