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इंदौर के कृष्ण विहार इलाके से 15 साल का किशोर अचानक घर छोड़कर चला गया। पीछे छोड़े गए पत्र में उसने प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों से प्रभावित होने और “असली परिवार” के पास जाने की बात लिखी है। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

इंदौर। स्थानीय कृष्ण विहार इलाके से एक 15 वर्षीय किशोर के अचानक घर छोड़कर जाने का मामला सामने आया है। यह किशोर घर से क्रिकेट खेलने जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। जब परिवार को उसकी कोई खबर नहीं मिली तो चिंता बढ़ गई। इसी दौरान घर में एक पत्र मिला, जिसे पढ़कर परिजन हैरान रह गए। पत्र में लिखा था-वह आध्यात्मिक प्रेरणा के कारण घर छोड़ रहा है। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया है। 

पत्र में लिखा-रोएं नहीं, खोजने की भी जरूरत नहीं 
परिवार ने बताया कि बच्चा सामान्य तरीके से घर से निकला था, इसलिए किसी को शक नहीं हुआ। जब देर रात तक वह वापस नहीं आया, तब चिंता हुई और खोजबीन शुरू की। बच्चे द्वारा छोड़े गए पत्र में उसने अपने माता-पिता, भाई और दादा को संबोधित करते हुए लिखा कि वह अब अपने असली परिवार के पास जा रहा है। उसने परिवार से यह भी अनुरोध किया कि वे रोएं नहीं और उसे ढूंढने की कोशिश भी न करें। पत्र में उसने लिखा कि अब वह अपने वास्तविक माता-पिता के साथ रहने जा रहा है। 

कहा-अपनी असलियत का एहसास हो गया 
उसने पत्र में लिखा-उसे अपनी असलियत का एहसास हो गया है और उसी कारण वह यह कदम उठा रहा है। उसने परिवार को यह भी संकेत दिया कि यदि वे उसकी बात समझना चाहते हैं, तो उसके फोटो में लिखे संदेश को देख सकते हैं, जिसमें संत प्रेमानंद महाराज के उपदेशों का जिक्र है। पत्र में एक और बात का उल्लेख करते हुए बच्चे ने कि उसने अपने एक दोस्त से 500 रुपए उधार लिए थे, जिन्हें परिवार को वापस कर देना चाहिए। उसने अपने परिवार को चिंता न करने की सलाह देते हुए अंत में धार्मिक भाव से जय माता दी लिखा। जांच में पता चला कि लड़के ने इंटरनेट पर देहरादून जाने वाली ट्रेन की जानकारी खोजी थी। 

पुलिस ने रेलवे व अन्य एजेंसियों को सतर्क किया
इसके बाद पुलिस ने रेलवे और अन्य संबंधित एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, ताकि यदि वह यात्रा करने की कोशिश करे तो उसे ढूंढा जा सके। बच्चे के बड़े भाई ने बताया कि वह पिछले कुछ समय से धार्मिक प्रवचनों और भजनों में काफी रुचि लेने लगा था। उसकी इंटरनेट गतिविधियों से यह भी सामने आया कि वह अक्सर संतों के प्रवचन सुनता था और धार्मिक सामग्री देखता था। परिवार का कहना है कि लड़का स्वभाव से शांत और धार्मिक प्रवृत्ति का था। वह रोज मंदिर जाता था और शाम को कुछ समय पूजा-पाठ तथा सेवा में भी बिताता था।  

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