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इच्छुक उम्मीदवार 5 मार्च तक अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे, जबकि 16 मार्च को मतदान और उसी शाम चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।

हरियाणा की सियासत में राज्यसभा की खाली होने वाली दो सीटों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से  अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही आज से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रदेश की दो सीटों पर कब्जा जमाने के लिए राजनीतिक दल अब अपनी बिसात बिछाने में जुट गए हैं।

नामांकन और मतदान का पूरा शेड्यूल
चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा चुनाव के लिए इच्छुक प्रत्याशी 5 मार्च तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद यदि आवश्यक हुआ तो 16 मार्च को मतदान की प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी। मतदान के तुरंत बाद उसी शाम चुनाव परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी। बता दें कि भाजपा के दो वर्तमान राज्यसभा सांसदों, किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल आगामी 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।

IAS पंकज अग्रवाल RO नियुक्त 
इस बार निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। कृषि विभाग के प्रधान सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर (RO) नियुक्त किया है। वहीं, हरियाणा विधानसभा के डिप्टी सेक्रेटरी गौरव गोयल को असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 
गौरतलब है कि आरओ की नियुक्ति को लेकर कुछ दिनों से विवाद की स्थिति बनी हुई थी। चुनावी मामलों के विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर मांग की थी कि निष्पक्षता बनाए रखने के लिए विधानसभा सचिव के स्थान पर किसी आईएएस अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाए। आयोग ने इस मांग पर मुहर लगाते हुए पंकज अग्रवाल के नाम पर फैसला लिया।

वर्तमान में सदन की स्थिति 
हरियाणा विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो कुल 90 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए जो जादुई आंकड़ा (कोटा) चाहिए, वह 31 वोटों का है। वर्तमान में सदन का समीकरण कुछ इस प्रकार है। 
• भाजपा: 48 विधायक
• कांग्रेस: 37 विधायक
• इनेलो: 02 विधायक
• निर्दलीय: 03 विधायक 

ये है दोनों सीटों को जीतने का समीकरण 
1. पहली सीट:
भाजपा के पास 48 विधायक हैं, जो 31 के कोटे से कहीं अधिक हैं। ऐसे में भाजपा की एक सीट पूरी तरह सुरक्षित है। पहली सीट जीतने के बाद भाजपा के पास 17 अतिरिक्त वोट बचेंगे।
2. दूसरी सीट: कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। 31 वोट अपने उम्मीदवार को देने के बाद भी कांग्रेस के पास 6 वोट शेष बचेंगे। इस लिहाज से दूसरी सीट पर कांग्रेस का दावा बेहद मजबूत है।

कम से कम 9 'क्रॉस वोट' की जरूरत पड़ेगी 
यदि भाजपा और कांग्रेस दोनों केवल एक-एक उम्मीदवार उतारते हैं, तो चुनाव की नौबत नहीं आएगी और नाम वापसी के अंतिम दिन ही दोनों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा। हालांकि, यदि भाजपा अपना दूसरा प्रत्याशी मैदान में उतारती है, तो उसे अपनी दूसरी सीट जिताने के लिए विपक्षी खेमे में बड़ी सेंधमारी करनी होगी। भाजपा को अपने 17 शेष वोटों के अलावा निर्दलीय, इनेलो और कांग्रेस के विधायकों से कम से कम 9 'क्रॉस वोट' की जरूरत पड़ेगी, जो फिलहाल एक कठिन चुनौती नजर आती है।

रामचंद्र जांगड़ा और किरण चौधरी निर्विरोध चुने गए थे 
इतिहास पर नजर डालें तो रामचंद्र जांगड़ा मार्च 2020 में निर्विरोध निर्वाचित होकर सदन पहुंचे थे। वहीं, किरण चौधरी ने अगस्त 2024 में हुए उपचुनाव में निर्विरोध जीत हासिल की थी। किरण चौधरी की यह सीट दीपेंद्र हुड्डा के लोकसभा चुनाव जीतने और राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी।
अब देखना यह होगा कि क्या इस बार भी दोनों दल आपसी सहमति से एक-एक सीट बांट लेते हैं या फिर चुनावी मैदान में शक्ति परीक्षण देखने को मिलेगा।

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