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धर्मेंद्र खुराना, करनाल: नीलोखेड़ी से निर्दलीय विधायक धर्मपाल गोंदर ने भाजपा से पलटकर अब कांग्रेस को समर्थन दे दिया है। कल दिनभर इस घटनाक्रम को लेकर हलचल मची रही, लेकिन यह कोई हैरानी जनक पहलू नहीं था। क्योंकि इसकी पटकथा 2 साल पहले हुए नपा चुनाव में लिखी जा चुकी थी। केवल मौके का इंतजार किया जा रहा था और इससे बढ़िया मौका इन विधायक के पास और कोई नहीं था। लोहा गरम था तो इन्होंने भी चोट लगाने में देर नहीं लगाई। दरअसल इसके पीछे की कहानी कुछ अलग है। मंत्री पद न मिलने के कारण विधायक धर्मपाल कांग्रेस के पाले में नहीं गए, भाजपा उन्हें लगातार नजर अंदाज कर रही थी। इसी के चलते विधायक धर्मपाल ने 2 साल पहले हुए तरावड़ी नपा अध्यक्ष चुनाव में बगावती तेवर दिखा दिए थे।

नपा अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस को दिया था समर्थन

विधायक धर्मपाल ने नपा अध्यक्ष चुनाव में भाजपा की उम्मीदवार को दरकिनार करते हुए कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को न केवल अपना समर्थन दिया, बल्कि उसके साथ बाइक पर बैठकर रोड शो भी किया। जिस दिन मतदान हो रहा था तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल करनाल पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में वर्करों की बैठक ले रहे थे। उन्हें इस बात का फीडबैक भी दिया गया और बाकायदा मुख्यमंत्री ने विधायक धर्मपाल से इस बाबत बातचीत भी की, लेकिन विधायक धर्मपाल ने इसकी परवाह किए बिना विपक्षी उम्मीदवार का खुलकर साथ दिया। आखिरकार यह चुनावी मैच नीलोखेड़ी के पिछले विधानसभा चुनाव की तरह जहां भाजपा का उम्मीदवार नजदीकी अंतर से चुनाव हार गया और जीत निर्दलीय विधायक के समर्थित उम्मीदवार की हुई। इसके बाद भी लगातार उनकी अनदेखी की गई जिसके चलते उन्होंने समर्थकों के दबाव में आकर कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा कर दी।

विधायक धर्मपाल के इसलिए हुए बगावती तेवर

19 जून 2022 को हुए नपा चुनाव में नीलोखड़ी विधानसभा क्षेत्र में अध्यक्ष पद के लिए जितने उम्मीदवारों को भाजपा ने मैदान में उतारा, उनके लिए एक बार भी मौजूदा विधायक से राय नहीं ली गई। उनको विश्वास में नहीं लिया गया। यहीं से विधायक की नाराजगी का दौर शुरू हुआ। इतना ही नहीं, उस दौरान राज्यसभा में वोटिंग थी, विधायक ने अपनी शर्त के आगे निसिंग के उम्मीदवार को बदलने के लिए भाजपा को झुकने पर मजबूर कर दिया। यही संदेश उन्होंने तरावड़ी में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा को दे दिया। अब जब चुनाव का समय आया और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को लोकसभा से प्रत्याशी घोषित किया गया तो उनके कार्यक्रमों में विधायक धर्मपाल को ना तो आमंत्रित किया और ना ही इसके बारे में कोई सूचना दी। जिसके चलते उन्होंने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए कांग्रेस को समर्थन दे दिया।