मंगलवार को भिवानी के भगत सिंह चौक स्थित स्वावलंबन केंद्र में आयोजित प्रेसवार्ता में विभाग संयोजक अमित बंसल मुढ़ालिया ने बताया कि इस बार उत्सव केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भिवानी विभाग के चारों जिलों— भिवानी, दादरी, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी में बड़े स्तर पर मनाया जाएगा।
प्रमुख कार्यक्रम और तैयारियां
- भगवामय होंगे चौक-चौराहे: चारों जिलों के मुख्य चौक-चौराहों को भगवा ध्वजों और विशेष सजावट से भव्य रूप दिया जाएगा।
- प्रभात फेरी का आयोजन: जिला संयोजक धीरज सोनी ने बताया कि 19 मार्च की सुबह हनुमान ढाणी से एक विशाल प्रभात फेरी निकाली जाएगी, जो पूरे शहर में घूमकर लोगों को नववर्ष के प्रति जागरूक करेगी।
- घरों पर फहराएंगे ध्वज: मंच ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस दिन अपने घरों पर भगवा ध्वज फहराएं और शाम को दीप जलाकर उत्सव मनाएं।
- हिंदू नववर्ष बनाम अंग्रेजी नववर्ष: आध्यात्मिक व वैज्ञानिक तर्कस्वदेशी जागरण मंच के पदाधिकारियों ने हिंदू नववर्ष की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालते हुए इसकी तुलना अंग्रेजी कैलेंडर से की है।"अंग्रेजी नववर्ष के समय दुनिया ठंड और सुस्ती में होती है, जबकि हिंदू नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) प्रकृति के नवजीवन का समय है। पेड़ों पर नई कोंपलें आती हैं और ऋतु परिवर्तन होता है। यह पूर्णतया खगोलीय गणनाओं और पंचांग पर आधारित वैज्ञानिक पद्धति है।" — अमित बंसल मुढ़ालिया
महत्वपूर्ण तथ्य
- सृष्टि की रचना: मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी।
- विक्रम संवत: इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का आरंभ किया था।
- सात्विकता: मंच के अनुसार, अंग्रेजी नववर्ष पार्टी और नशे के नाम पर मनाया जाता है, जबकि हिंदू नववर्ष पूजा, पाठ और हवन के साथ सात्विक तरीके से मनाया जाता है।
सांस्कृतिक एकता का आह्वान
मंच के पदाधिकारियों—अतुल गुप्ता, विजय टुटेजा और मोहित ने नई पीढ़ी से अपनी जड़ों की ओर लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हमारी सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन का प्राण है। यह उत्सव हमारी सांस्कृतिक एकता और अखंडता का प्रतीक बनेगा।
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