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सुरेन्द्र असीजा, फतेहाबाद: लोकसभा चुनाव को 5 दिन शेष बचे हैं। बीएलओ शहर के सभी वार्डों में घर-घर जाकर मतदाताओं को वोटर स्लिप बांट रहे है। बड़ी बात यह है कि इन पर्चियों में वह लोग भी शामिल हैं, जो इस दुनिया में नहीं है। यानि इनमें से अनेक मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है। जब बीएलओ घर-घर जा रहे हैं तो उन्हें पता चला रहा है कि कौन-सा मतदाता अब इस दुनिया में नहीं है तो उनके सामने एक समस्या खड़ी हो जाती है। क्योंकि अब समय भी इतना रहा है कि कुछ हो भी नहीं सकता। इन मतदाताओं के नाम सर्वे के बावजूद भी मतदाता सूची से नहीं काटे गए।

जिसे मरे एक साल हो गया, उसके नाम की लगा रहे आवाज

शहर के एक वार्ड में बीएलओ पहुंचा तो उसने एक घर में आवाज लगाई कि सज्जन कुमार, परिवार के लोग बोले कि उन्हें मरे हुए करीब एक साल हो गया। ऐसा ही प्रत्येक वार्ड में हो रहा है। हर वार्ड के बीएलओ को जिम्मेदारी दी गई है कि वह अपने- अपने वार्ड में जाकर लोगों को लोकसभा चुनाव में मतदान करने के लिए मत पर्ची दे। इसको लेकर वोटर लिस्ट व मत पर्ची लेकर वह वार्डों में जा रहे हैं। इसी को लेकर जवाहर चौक इलाका बीएलओ संजीव के घर पहुंचा तो उनसे माता पिता का नाम पूछा। जिस पर उसने बता दिया। इसके बाद बीएलओ ने कहा कि पुष्पा तो उसने कहा कि उसकी ताई थी जिसे मरे हुए करीब एक साल होने को हैं और आप ही कुछ समय पहले परिवार के मृत सदस्य को लेकर रिपोर्ट दर्ज कर ले गए थे। यह सुनकर बीएलओ भी परेशान हो गया।

तीन साल हुए दादी को मरे, नहीं कटा फिर भी वोट

शिव नगर निवासी सुरज की दादी संतोष को गुजरे हुए करीब तीन साल हो गए, लेकिन वोटर लिस्ट में आज भी उनकी दादी जिंदा है। जबकि उनके द्वारा परिवार में मरे हुए सदस्यों के बारे बीएलओ द्वारा लिस्ट में नाम लिखकर ले गए थे ताकि उसकी दादी का नाम वोटर लिस्ट नाम काट सके, लेकिन अब बीएलओ से पता चला कि उनकी दादी का वोट तो कटा ही नहीं। यह उन्हें तब पता चला, जब उन्होंने दादी के नाम की मत पर्ची होनी बताई। जब बीएलओ को कहा कि उन्होंने मृत होने की जानकारी दी, फिर भी वोट क्यों नहीं कटा। यहां बीएलओ ने कहा कि हमारे द्वारा उच्च अधिकारियों को लिस्ट भेज दी गई थी। इस बारे में ओर कुछ नहीं कह सकते।

क्या कहते हैं एसडीएम

इस बारे एसडीएम राजेश कुमार ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि सर्वे के बावजूद भी मतदाता सूची में मृतकों के नाम कैसे रह गए। वह इस बारे में पता करवा रहे हैं। लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। मृत लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटने चाहिए थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो गंभीर विषय है और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आ रही है।