हरियाणा के कैथल जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम में एक बड़ा खुलासा हुआ है। गुहला-चीका में 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए ब्लॉक डेवलपमेंट एंड पंचायत ऑफिसर (BDPO) जगजीत सिंह के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। शिकायतकर्ता ने अब सीधे तौर पर गुहला के उपमंडल अधिकारी (SDM) की संलिप्तता के आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित न रहकर बड़े भ्रष्टाचार के नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है।
पांच उंगलियों का इशारा और 5 लाख की डिमांड
बदसुई गांव के निवासी शिकायतकर्ता संदीप ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को दिए अपने बयान में चौंकाने वाले तथ्य रखे हैं। संदीप के अनुसार जब वह अपने मकान को गिराए जाने के नोटिस के समाधान के लिए बीडीपीओ से मिला तो अधिकारी ने बिना कुछ बोले हाथ की पांच उंगलियां दिखाकर पांच लाख रुपये की मांग का संकेत दिया।
संदीप ने बताया कि जब उसने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए असमर्थता जताई, तो बीडीपीओ ने स्पष्ट किया कि इस राशि में वह अकेला हिस्सेदार नहीं है। रिकॉर्डिंग के हवाले से दावा किया गया है कि बीडीपीओ ने साफ तौर पर एसडीएम साहब का नाम लिया और कहा कि उन्हें भी हिस्सा पहुंचाना पड़ता है, क्योंकि वे खुद इस मामले में व्यक्तिगत रुचि ले रहे हैं।
मकान गिराने का डर दिखाकर वसूली का खेल
पूरा मामला एक पुराने विवाद से जुड़ा है। संदीप का कहना है कि वर्ष 2000 के एक पुराने अदालती फैसले के खिलाफ उनके पास सिविल कोर्ट और कमिश्नर कोर्ट का स्टे (स्थगन आदेश) मौजूद है। इसके बावजूद, बीडीपीओ जगजीत सिंह नियमों को ताक पर रखकर मकान गिराने का दबाव बना रहा था। अधिकारी ने बाकायदा मकान ढहाने का पत्र जारी कर दिया था, ताकि पीड़ित परिवार डर जाए और मोटी रकम देने को तैयार हो जाए। इसी डर को खत्म करने की एवज में 5 लाख रुपये मांगे गए थे।
एसीबी की रंगे हाथ कार्रवाई और ऑडियो सबूत
भ्रष्ट तंत्र को बेनकाब करने के लिए संदीप ने बीडीपीओ के साथ हुई अपनी बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया। इस पुख्ता सबूत के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने जाल बिछाया और अधिकारी को कार्यालय से ही रिश्वत की राशि के साथ दबोच लिया। एसीबी इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने पुष्टि की है कि बीडीपीओ को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रिश्वतकांड की जड़ें कितनी गहरी हैं और कौन-कौन से बड़े नाम इसमें शामिल हैं।
एसडीएम पर पहले भी लग चुके हैं आरोप
दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में जिस एसडीएम कैप्टन परमेश सिंह का नाम सामने आया है, वे पहले भी विवादों में रहे हैं। कुछ समय पूर्व गुहला से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस ने सार्वजनिक रूप से उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्हें 'झुनझुना' भेंट करने की कोशिश की थी। विधायक ने तब तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि अधिकारी का काम सिर्फ पैसा कमाना रह गया है। हालांकि, वर्तमान मामले में एसडीएम ने अपनी सफाई में कहा है कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है और न ही उनका इससे कोई लेना-देना है।
कई रसूखदार रडार पर
बीडीपीओ की गिरफ्तारी के बाद अब एसीबी की टीम डिजिटल साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही है। शिकायतकर्ता द्वारा एसडीएम का नाम लिए जाने के बाद ब्यूरो अब इस पहलू की भी गहनता से जांच कर रहा है कि क्या वाकई रिश्वत की यह रकम ऊपर तक जानी थी। फिलहाल, आरोपी अधिकारी को न्यायिक हिरासत में भेजकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है। कैथल के इस रिश्वतकांड ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।










