राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' का रविवार को समापन, सरकार्यवाह ने कहा कि संघ अब पानीपत के 'माधव सृष्टि' केंद्र को नागपुर मुख्यालय की तर्ज पर विकसित करेगा।

हरियाणा के पानीपत जिले में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' का रविवार को औपचारिक समापन हो गया। बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से लेकर संघ के भविष्य के विस्तार और सामाजिक समरसता जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा की। 

संघ सदैव वैश्विक शांति का पक्षधर
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और ईरान के संदर्भ में भारत सरकार के रुख पर होसबाले ने केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत का वर्तमान स्टैंड राष्ट्रहित में है और संघ का यह मानना है कि सरकार की विदेश नीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ सदैव वैश्विक शांति का पक्षधर रहा है और वर्तमान परिस्थितियों में भारत की भूमिका अत्यंत संतुलित है।

पड़ोसी देशों से मधुर संबंधों की आवश्यकता 
दत्तात्रेय होसबाले ने दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता पर अपने विचार रखकर कहा कि भारत के पड़ोसी देशों विशेषकर नेपाल और बांग्लादेश में आए राजनीतिक बदलावों के बीच शांति और स्थिरता अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि एशिया की प्रगति और सुरक्षा के लिए इन देशों के साथ भारत के प्रगाढ़ संबंध होना जरूरी है। हालांकि, उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा और वहां हो रही घटनाओं पर गहरी चिंता भी व्यक्त की।

हिंदुत्व जीवन जीने की कला 
वैचारिक स्पष्टता पर जोर देते हुए सरकार्यवाह ने कहा कि भारतीयता और हिंदुत्व की अवधारणा को लेकर समाज में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व केवल एक संकीर्ण मानसिकता नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी एक उत्कृष्ट जीवनशैली है। यह संपूर्ण समाज को जोड़ने और साथ लेकर चलने का दर्शन है। 

नागपुर की तर्ज पर विकसित होगा पानीपत का 'माधव सृष्टि' 
संघ अब उत्तर भारत में अपनी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए हरियाणा के पानीपत को एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने जा रहा है। पट्टीकल्याणा स्थित 'माधव सृष्टि साधना केंद्र', जो लगभग 25 एकड़ में फैला है, उसे संघ के नागपुर मुख्यालय की तर्ज पर आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। 

रणनीतिक महत्व 
• दिल्ली से निकटता और बेहतर सड़क मार्ग के कारण यह केंद्र उत्तर भारतीय राज्यों के लिए मुख्य संपर्क सूत्र बनेगा। 
• 8 साल पहले सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इसकी नींव रखी थी, जिसे अब अपग्रेड किया जाएगा। 
• यहां से पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और दिल्ली जैसे राज्यों की सांगठिनक गतिविधियों का संचालन सुलभ होगा। 

संघ का प्रभाव देश के कोने-कोने में तेजी से बढ़ा 
संघ अपने स्थापना के 100 वर्ष (2025-26) पूरे करने जा रहा है। प्रतिनिधि सभा में पेश की गई वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार संघ का प्रभाव देश के कोने-कोने में तेजी से बढ़ा है।  
• शाखाओं में वृद्धि: वर्तमान में देशभर में संघ की कुल 88,949 शाखाएं सक्रिय हैं।
• प्रगति: पिछले एक वर्ष के भीतर ही 5,820 नई शाखाओं का विस्तार हुआ है।
• चुनौतियां: रिपोर्ट में केरल, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों में आने वाली बाधाओं और वहां संघ के बढ़ते कार्य का विशेष उल्लेख किया गया।

महापुरुषों की जयंतियों का उत्सव
होसबाले ने बताया कि संघ अपने शताब्दी वर्ष को सामाजिक सद्भाव के रूप में मना रहा है। उन्होंने सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व और संत शिरोमणि रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों का जीवन 'समरस समाज' के निर्माण की प्रेरणा देता है।

राजनीतिक रूप से कठिन राज्यों के लिए विशेष रणनीति
बैठक के दौरान उन राज्यों पर विशेष ध्यान दिया गया जहां संघ या उससे जुड़ी विचारधारा का प्रभाव तुलनात्मक रूप से कम है। संघ ने अगले दो वर्षों के लिए चार राज्यों केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल को प्राथमिकता सूची में रखा है। इन राज्यों के लिए 'माइक्रो-मैनेजमेंट' और सांगठनिक बदलावों पर सहमति बनी है।

पंजाब के लिए 'चतुष्कोणीय' योजना 
पंजाब की विशिष्ट सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए संघ ने चार प्रमुख रणनीतियों पर काम करने का निर्णय लिया है। 
1. राष्ट्रीय सिख संगत की सक्रियता: सिखों और हिंदुओं के बीच 'नख-मांस' (नाखून और मांस) के अटूट संबंध को मजबूत करने के लिए 'राष्ट्रीय सिख संगत' को पुनर्जीवित किया जाएगा। कार्यकर्ता घर-घर जाकर संवाद करेंगे।
2. नशा मुक्ति अभियान : पंजाब की युवा पीढ़ी को ड्रग्स के जाल से बचाने के लिए स्वयंसेवक गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाएंगे।
3. ममता संगम: महिलाओं को जोड़ने के लिए 'ममता संगम' जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक सुझाव लिए जाएंगे।
4. प्रवासी पंजाबियों से संपर्क: 'पंच प्रभुदन' कार्यक्रम के जरिए विदेशों में बसे पंजाबियों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने का प्रयास होगा। 

अंतिम सत्र में सुझावों पर चर्चा की
प्रतिनिधि सभा के अंतिम सत्र में सरसंघचालक मोहन भागवत ने विभिन्न संगठनों के सुझावों पर चर्चा की और आगामी वर्ष की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया। इस तीन दिवसीय मंथन में 1487 वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को वैचारिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ बनाना है। 

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