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राजेश्वर बैनीवाल, हिसार: जिले के गांव डोभी में पिछड़ा वर्ग चौपाल में अवैध रूप से निजी स्कूल चलाए जाने का मामला सामने आया। शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली के चलते इस स्कूल पर कार्रवाई नहीं हो पा रही, जबकि पिछले वर्ष पंचायत ने इस स्कूल की शिकायत की थी। शिकायत के बाद जांच हुई, शिकायत सही पाई गई और बात कार्रवाई पर अटक गई। नारनौल में हुए स्कूल बस हादसे के बाद जहां पूरी सरकार स्कूलों के मामलों में गंभीर है, वहीं जिले के शिक्षा अधिकारियों पर शायद ऐसा कोई असर नहीं है। इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के विचार भी अलग-अलग व चौंकाने वाले हैं।

कब्जा हटाने का दिया निर्देश

ग्राम पंचायत ने अपनी शिकायत में कहा कि ग्राम पंचायत ने उक्त स्कूल संचालक को पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 24(1) का नोटिस दिया। नोटिस में स्कूल संचालक को नोटिस प्राप्ति के तीन दिन के अंदर-अंदर कब्जा हटाने का निर्देश दिया, लेकिन उसने पंचायत के नोटिस पर कोई गौर नहीं किया। ग्राम पंचायत ने अपनी शिकायत में खंड शिक्षा अधिकारी से मांग की कि अवैध रूप से स्कूल चला रहे संचालक पर कार्रवाई की जाए और पंचायत को उसका कब्जा दिलवाया जाए। खंड शिक्षा अधिकारी को भेजी शिकायत के साथ पंचायत ने स्कूल संचालक को दिए नोटिसों की प्रति भी लगाई।

खंड शिक्षा अधिकारी ने जांच को लिखा

ग्राम पंचायत की शिकायत मिलने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी ने जांच के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डोभी के प्राचार्य को जांच के लिए लिखा। खंड शिक्षा कार्यालय ने 30 जून 2023 को जांच के निर्देश देते हुए प्राचार्य को कहा कि दो वरिष्ठ प्राध्यापकों को साथ लेकर जांच की जाए और रिपोर्ट तीन दिन के अंदर-अंदर उनके कार्यालय को भेजी जाए। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डोभी के प्राचार्य पर आधारिक तीन सदस्यीय कमेटी ने शिकायत की जांच की। जांच में प्राचार्य की कमेटी ने साफ लिखा कि गांव की बीसी चौपाल में लिटल ड्रीम प्ले स्कूल चल रहा है, इसका मान्यता नहीं है और संचालक खारिया निवासी कुलदीप है।

ये रहे जांच समिति में शामिल

अवैध रूप से चल रहे स्कूल की जांच करने वाली समिति में तत्कालीन प्राचार्या रेखा मलिक के अलावा दो सदस्य पीजीटी सतपाल सिंह व विजयपाल सिंह शामिल रहे। जांच रिपोर्ट 4 जुलाई 2023 को खंड शिक्षा अधिकारी, हिसार-2 के कार्यालय को भेज दी गई। पंचायत ने गांव की बीसी चौपाल में अवैध स्कूल चलने की शिकायत की, शिकायत की जांच करवाई गई, शिकायत सही पाई गई और इसके बावजूद स्कूल पर कार्रवाई करने की बजाय इसे ठंडे बस्त में डाल दिया गया। यह तो विभाग के अधिकारी ही जानें कि शिकायत सही पाने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई लेकिन गांव में चर्चा के अनुसार राजनीतिक दबाव के चलते शिक्षा अधिकारी इस अवैध स्कूल पर कार्रवाई करने से परहेज करते रहे।

फिलहाल चुनाव ड्यूटी, देखकर कार्रवाई करेंगे : बीईओ

खंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मामला तो काफी पुराना है लेकिन फिलहाल देखना पड़ेगा कि कार्रवाई क्यों नहीं हुई। फिलहाल वे चुनाव ड्यूटी के चलते कार्यालय से कटे हुए हैं, चुनाव के बाद ही कुछ देखा जाएगा। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी निर्मल दहिया का कहना है कि मामला खंड शिक्षा अधिकारी के ध्यान में होगा। पता लगाया जाएगा कि कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यदि इस तरह कोई स्कूल अवैध चल रहा है तो कार्रवाई अवश्य होगी।

डाटा एकत्रित कर रहे, सरकार को भेजेंगे : प्रदीप नरवाल

पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी प्रदीप नरवाल का जवाब और भी चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि केवल एक स्कूल नहीं, और भी अवैध स्कूल है, उनका डाटा एकत्रित कर रहे हैं, जो सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद जो भी अवैध स्कूल है, उन पर कार्रवाई होगी। जब उनका ध्यान ग्राम पंचायत की शिकायत की तरफ दिलाया गया तो उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत तो अपने आप में पावरफुल बॉडी होती है, वह भी ग्रामीणों को समझा बुझाकर बता सकती है कि यह अवैध स्कूल है, इसमें बच्चों को मत पढ़ाओ।