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सिरसा से बड़ी संख्या में सरकारी अस्पताल की एक्सपायरी दवाइयों के बॉक्स लावारिस हालत में पाये गये हैं।जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सिरसा जिले के ओढ़ा कस्बे के पास नेशनल हाईवे-9 के किनारे बड़ी संख्या में सरकारी अस्पताल की एक्सपायरी दवाइयों के बॉक्स लावारिस हालत में मिले हैं। मामला तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने घटना का संज्ञान लेते हुए सख्त जांच के आदेश दिए हैं।

सड़क किनारे दवाइयों के दिखे ढेरों कार्टन
नेशनल हाईवे से गुजर रहे राहगीरों ने सड़क किनारे दवाइयों के ढेरों कार्टन बिखरे देखे। पास जाकर देखने पर पता चला कि ये दवाइयां सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में इस्तेमाल होने वाली हैं और इनमें से अधिकतर की एक्सपायरी डेट निकल चुकी है। किसी जागरूक राहगीर ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया।

भाजपा नेता की पहल पर जागी सरकार
इस शर्मनाक घटना की जानकारी मिलते ही कालावाली भाजपा मंडल अध्यक्ष लवली गर्ग ने प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव को तत्काल सूचना दी। गर्ग ने इसे सरकारी संसाधनों की बर्बादी और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करार दिया। उन्होंने मांग की कि इस मामले में शामिल अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिखाई मामले पर गंभीरता
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने ओढ़ा के एसएमओ को तत्काल प्रभाव से मौके पर पहुँचने और दवाइयों को कब्जे में लेने के निर्देश दिए। दवाइयों के बैच नंबर और सोर्स की गहनता से जांच की जाए।यह पता लगाया जाए कि इन दवाइयों को नियमानुसार नष्ट करने के बजाय सड़क पर किसने फेंका।दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

जांच में जुटी विभाग की टीम
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में लगभग 100 बॉक्स दवाइयां बरामद की गई हैं, जिनमें टैबलेट, सिरप और इंजेक्शन शामिल हैं। विभाग अब रिकॉर्ड खंगाल रहा है कि ये दवाइयां किस अस्पताल के स्टोर से जारी हुई थीं।

जनता ने जताया आक्रोश
स्थानीय लोगों ने इस घटना पर गहरा रोष जताया है। लोगों का कहना है कि जब सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अक्सर दवाइयों की किल्लत का सामना करना पड़ता है, तब इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी दवाइयों का सड़क पर फेंका जाना घोर लापरवाही है। लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या सरकारी सिस्टम में मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं है? फिलहाल विभाग बैच डिटेल के जरिए संबंधित अस्पताल या स्टोर की पहचान करने में जुटा है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होते ही स्वास्थ्य विभाग के कई बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।

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