हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) ने पीजीटी कंप्यूटर साइंस भर्ती परीक्षा की तारीख घोषित कर दी है। परीक्षा 10 मई 2026 को आयोजित होगी। लेकिन इससे पहले ही भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता दिख रहा है, क्योंकि पिछली भर्ती में 98% पद खाली रह गए थे और अब नई भर्ती पर भी सवाल उठने लगे हैं।
भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
HPSC के कार्यप्रणाली के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां कंप्यूटर साइंस पीजीटी की एक भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि आयोग ने दूसरी भर्ती का विज्ञापन निकाल दिया। जानकारों और अभ्यर्थियों का कहना है कि पहली चयन प्रक्रिया को तार्किक परिणति तक पहुंचाए बिना नई अधिसूचना जारी करना नियम विरुद्ध और जल्दबाजी में उठाया गया कदम प्रतीत होता है।
5 प्रतिशत के नियम ने बिगाड़ा खेल आयोग की पिछली भर्ती के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले रहे हैं। साल 2023 में हरियाणा कैडर के 1633 और मेवात कैडर के 78 पदों के लिए करीब 5 हजार युवाओं ने परीक्षा दी थी। लेकिन आयोग द्वारा लागू किए गए 35 प्रतिशत अंक के अनिवार्य मानदंड (Criteria) की वजह से केवल 39 उम्मीदवार ही सफल हो पाए।
यह कुल पदों (1711) का मात्र 2.45 प्रतिशत हिस्सा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि लगभग 98 प्रतिशत पद रिक्त रह गए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कड़े नियमों और कठिन मूल्यांकन के कारण योग्य उम्मीदवार भी इस दौड़ से बाहर हो गए।
कुल 1672 रिक्तियों के लिए आवेदन मांगे
नई भर्ती अधिसूचना के तहत कुल 1672 रिक्तियों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसमें पदों का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है:
हरियाणा कैडर (1594 पद): सामान्य श्रेणी- 859, एससी- 327, बीसीए- 163, बीसीबी- 82 और ईडब्ल्यूएस- 163।
मेवात कैडर (78 पद): सामान्य- 43, एससी- 15, बीसीए- 8, बीसीबी- 4 और ईडब्ल्यूएस- 8।
हैरानी की बात यह है कि जल्दबाजी में जारी किए गए इस विज्ञापन में अनुसूचित जाति (SC) के पदों का DSC (Deprived SC) और OSC (Other SC) के बीच स्पष्ट वर्गीकरण नहीं किया गया है। आयोग का कहना है कि यह बंटवारा भविष्य में किया जाएगा, जिसे लेकर उम्मीदवारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
चयन मानदंडों में लचीलापन लाने की मांग
यह पहली बार नहीं है जब HPSC की किसी भर्ती में पदों के मुकाबले बेहद कम अभ्यर्थी पास हुए हों। इससे पहले कॉलेज कैडर में असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेजी) की भर्ती में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला था, जिसके विरोध में अभ्यर्थी अभी भी आंदोलन कर रहे हैं। कंप्यूटर साइंस के अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब तक चयन मानदंडों में लचीलापन नहीं लाया जाता, तब तक बड़ी संख्या में पदों का खाली रहना तय है।
अब सबकी नजरें 10 मई को होने वाली परीक्षा पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार अभ्यर्थी 35 प्रतिशत की बाधा पार कर पाते हैं या फिर पिछली बार की तरह पद खाली रह जाएंगे।