स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति पर रोक लगा दी है। इंडियन ऑयल के पास मात्र 3.5 दिन, जबकि बीपीसीएल और एचपीसीएल के पास 6 से 7 दिनों का भंडार है।

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध की गूंज अब हरियाणा की रसोई और उद्योगों में सुनाई देने लगी है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा असर हरियाणा के गैस वितरण तंत्र पर पड़ा है। प्रदेश में वर्तमान स्थिति यह है कि तेल कंपनियों के पास घरेलू एलपीजी (LPG) का औसतन केवल एक सप्ताह का भंडार बचा है। इस आपात स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यावसायिक (Commercial) सिलेंडरों की आपूर्ति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, जिससे शादियों के सीजन में कैटरर्स और होटल संचालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 

तेल कंपनियों ने बयां की चिंताजनक स्थिति 
हरियाणा में एलपीजी वितरण का जिम्मा संभालने वाली तीनों प्रमुख तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने सरकार को भेजी अपनी रिपोर्ट में स्टॉक की चिंताजनक स्थिति बयां की है। 
• इंडियन ऑयल (IOCL): कंपनी के पास मात्र 3.5 दिनों का घरेलू गैस स्टॉक बचा है। हालांकि कुछ स्टॉक रास्ते में है, लेकिन वर्तमान खपत के मुकाबले यह बेहद कम है।
• भारत पेट्रोलियम (BPCL): इसके पास सबसे अधिक करीब 7.1 दिनों की आपूर्ति क्षमता है।
• हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL): कंपनी के पास 5.8 दिनों तक की मांग पूरी करने का भंडार मौजूद है। 
प्रदेश में हर दिन लगभग 3,053 टन घरेलू गैस की खपत होती है, जबकि व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए रोजाना 580 टन गैस की आवश्यकता पड़ती है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से अब घरेलू सिलेंडरों की डिलीवरी में भी 7 से 10 दिनों की देरी होने लगी है, जो पहले महज 24 से 48 घंटों में मिल जाया करते थे। 

मुख्यमंत्री ने कहा- कालाबाजारी पर रहेगी पैनी नजर
गैस की किल्लत और जनता के बीच बढ़ते डर (Panic) को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने चंडीगढ़ में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की आपातकालीन बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि इस संकट की आड़ में गैस की कालाबाजारी या जमाखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाए और सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी घर का चूल्हा न बुझे। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने भी पुष्टि की है कि एजेंसियों को दैनिक रिपोर्टिंग करने और स्टॉक की पारदर्शिता बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं।

पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री ठप 
इस गैस संकट का सबसे घातक प्रहार पानीपत के औद्योगिक क्षेत्र पर हुआ है। गैस आधारित लगभग 250 टेक्सटाइल और हैंडलूम इकाइयां बंद हो गई हैं, जिससे करोड़ों के टर्नओवर और हजारों मजदूरों के काम पर असर पड़ा है। कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल होने वाले पॉलिएस्टर धागे की कीमतों में भी 20% तक का उछाल आया है। 
वहीं, शादियों के इस व्यस्त सीजन में व्यावसायिक सिलेंडरों पर लगी रोक ने खुशियों में खलल डाल दिया है। जींद और गुरुग्राम जैसे शहरों में कैटरर्स का कहना है कि दो दिनों से सप्लाई पूरी तरह बंद है। गुरुग्राम में तो कुछ विक्रेताओं द्वारा ऊंचे दामों पर सिलेंडर बेचने की खबरें भी सामने आ रही हैं, जहां मजबूरन लोग 15 हजार रुपये में 4 सिलेंडर तक खरीदने को तैयार हैं। 

एजेंसियों के बाहर लगी लंबी लाइनें  
प्रदेश के विभिन्न जिलों से आ रही तस्वीरें डराने वाली हैं। कैथल और फरीदाबाद में लोग सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर कतारों में खड़े हैं।
• हिसार और कैथल: यहां मांग में चार गुना तक की बढ़ोतरी देखी गई है। एजेंसियों पर 200 की जगह 800 तक बुकिंग पहुंच रही है।
• पंचकूला: यहां वेटिंग पीरियड बढ़कर एक सप्ताह हो गया है। प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि कहीं घरेलू सिलेंडरों का उपयोग व्यावसायिक कार्यों में तो नहीं हो रहा। 
• सोनीपत (मुरथल): यहां के बड़े ढाबों पर पाइपलाइन (PNG) की सुविधा होने से फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन कंपनी ने 80% से अधिक उपयोग पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की चेतावनी दी है। 

घरेलू आपूर्ति को बचाए रखने पर ध्यान 
फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान घरेलू आपूर्ति को बचाए रखने पर है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं होता तो आने वाले दिनों में राशनिंग की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर अतिरिक्त सिलेंडर जमा न करें, ताकि जरूरतमंदों तक आपूर्ति सुचारू रह सके। 

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