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नरेन्द्र वत्स, रेवाड़ी: गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र के मुस्लिम बाहुल्य मेवात इलाके को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, लेकिन कांग्रेस में रहते हुए भी राव इंद्रजीत सिंह को इस क्षेत्र के किसी भी हलके में जीत नसीब नहीं हुई। वोट प्रतिशत के मामले में आंकड़े राव के लिए अनुकूल नहीं हैं। इस बार बदली हुई परिस्थितियों में राव को तीनों हलकों में बढ़त की उम्मीद है। खासकर प्रभावशाली मुस्लिम नेता जाकिर हुसैन का भाजपा में आना राव के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।

कांग्रेस ने 2009 चुनाव में राव को उतारा था मैदान में

राव को कांग्रेस पार्टी ने 2009 के लोकसभा चुनावों में मैदान में उतारा था। राव सीट निकालने में तो कामयाब हो गए थे, लेकिन मुस्लिम बाहुल्य तीन हलकों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में उन्हें नूंह हलके में 18.5 प्रतिशत, फिरोजपुर झिरका में 25.38 प्रतिशत और पुन्हाना में 26.38 प्रतिशत वोट ही हासिल हुए थे। इस चुनावों में तीनों ही हलकों में मुस्लिम नेता जाकिर हुसैन उन पर भारी पड़े थे। जाकिर को बीएसपी की टिकट पर चुनाव लड़ते हुए नूंह में 54.49, फिरोजपुर झिरका में 57.96 और पुन्हाना में 59.85 फीसदी वोट मिले थे। जाकिर इनेलो की टिकट पर वर्ष 2014 में चुनाव लड़ते हुए भी राव के मुकाबले काफी अधिक वोट हासिल करने में कामयाब हुए थे।

कांग्रेस के गढ़ में तीनों हलकों में मिली थी हार

कांग्रेस के गढ़ होने के बावजूद राव को तीनों हलकों में हार का सामना करना पड़ा था, जिससे यह साफ हो गया था कि मुस्लिम मतदाताओं को राव स्वीकार्य नहीं हैं। वर्ष 2014 को लोकसभा चुनाव जब भाजपा की टिकट पर लड़ा गया, तो भी तीनों हलकों में राव की स्थिति कमजोर रही। इस चुनाव में उन्हें नूंह से 18.5 फीसदी, फिरोजपुर झिरका से 13.42 और पुन्हाना से 11.43 प्रतिशत वोट ही मिल पाए थे। इस चुनाव में भी इनेलो की टिकट पर खड़े हुए जाकिर हुसैन ने तीनों हलकों में भारी मतों से जीत हासिल की थी।

मोदी लहर का नहीं रहा कोई असर

गत लोकसभा चुनावों में भी मोदी लहर का असर तीनों में से किसी भी हलके में नजर नहीं आया। इन हलकों में कांग्रेस प्रत्याशी कैप्टन अजय सिंह यादव को भारी समर्थन मिला। राव को नूंह में 28.34, फिरोजपुर झिरका में 19.15 व पुन्हाना में 20.81 फीसदी वोट ही मिल सके। कैप्टन नूंह में 67.94, फिरोजपुर झिरका में 78.74 और पुन्हाना में 76.5 फीसदी वोट लेकर इन हलकों में अच्छा जनाधार हासिल कर सके थे। तीनों लोकसभा चुनावों के आंकड़े इस बात का संकेत दे रहे हैं कि राव इंद्रजीत सिंह को मेवात क्षेत्र के मतदाताओं ने पसंद नहीं किया।

जाकिर के साथ से बदलाव की उम्मीद

भाजपा हाईकमान ने मुस्लिमों के गढ़ में सेंध लगाने के लिए प्रभावशाली नेता जाकिर हुसैन को पार्टी में ले लिया था। जाकिर का अपना व्यक्तिगत मजबूत वोट बैंक और नूंह हिंसा के बाद राव का बड़ा बयान इस बार उनके लिए मददगार साबित हो सकते हैं। राव को इस बार मेवात क्षेत्र के लोगों में बदलाव नजर आ रहा है। गत दिनों कार्यकर्ता सम्मेलन में उमड़ी भीड़ ने उन्हें इस बात के लिए आश्वस्त किया है कि इस बार वह मेवात क्षेत्र में खाली हाथ नहीं रहेंगे। जाकिर के साथ मेवात के अन्य कद्दावर नेता जुड़े होने का फायदा भी पार्टी को मिल सकता है।