हरियाणा में प्राइवेट बस संचालकों की ओर से रियायती और मुफ्त पास धारकों को बस में न चढ़ाने की लगातार मिल रही शिकायतों पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। परिवहन आयुक्त कार्यालय ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि प्रदेश की सभी निजी 'स्टेज कैरिज' बसों को अब हरियाणा रोडवेज की तर्ज पर ही सभी श्रेणियों के पास धारकों को यात्रा करवानी होगी। सरकार के इस फैसले से छात्रों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि निजी बस संचालकों ने इस पर बगावती सुर अपना लिए हैं।
1750 बसों पर लागू होगा नियम
परिवहन विभाग द्वारा सभी जिला परिवहन अधिकारियों (DTO) और सचिवों को भेजे गए पत्र में कड़े निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने साफ किया है कि 'स्टेज कैरिज स्कीम 2016' के तहत परमिट लेने वाले सभी निजी बस संचालक नियमों को मानने के लिए बाध्य हैं। प्रदेश में वर्तमान में चल रही लगभग 1750 निजी बसों को अब 'फ्री' और 'कन्सेशनल' पास धारकों को बिना किसी भेदभाव के सफर कराना होगा।
विभाग ने यह भी साफ किया है कि यदि कोई बस चालक या परिचालक पास धारक यात्री को बस में चढ़ने से रोकता है या दुर्व्यवहार करता है तो यात्री इसकी सीधी शिकायत क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) कार्यालय या विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर पर कर सकते हैं।
सरकार ने तीन मुख्य बिंदुओं पर विशेष जोर दिया
रोडवेज जैसी सुविधा : निजी बसों को छात्र, दिव्यांग, स्वतंत्रता सेनानी और अन्य श्रेणियों के पास धारकों को वही सम्मान और सुविधा देनी होगी जो हरियाणा रोडवेज में मिलती है।
कोई सरकारी मदद नहीं : सरकार ने दो टूक कहा है कि इस सेवा के बदले निजी ऑपरेटरों को कोई भी सरकारी सब्सिडी या आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी। इसे उनके परमिट की अनिवार्य शर्त माना गया है।
कानूनी बाध्यता : साल 2017 के आदेशों और वर्तमान परमिट नियमों की धारा 11 का हवाला देते हुए संचालकों को याद दिलाया गया है कि वे इन सुविधाओं के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी हैं।
निजी बस ऑपरेटरों का विरोध
सरकार के इस आदेश के बाद प्राइवेट बस संचालकों और सरकार के बीच ठन गई है। 'स्टेट गैरिज ट्रांसपोर्ट सोसायटी एंड प्राइवेट बस ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन' ने इस फैसले को तर्कहीन और शोषणकारी बताया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. धन सिंह का कहना है कि हरियाणा रोडवेज जब पास जारी करती है, तो वह यात्रियों या संबंधित विभागों से उसके बदले पैसा प्राप्त करती है।
डॉ. धन सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब रोडवेज को पास का पैसा मिलता है, तो निजी ऑपरेटर मुफ्त में यात्रा कराकर अपना आर्थिक नुकसान क्यों उठाएं? रोडवेज के पास तो खुद उनकी अपनी एसी और सिटी बसों में मान्य नहीं होते, तो फिर निजी बसों पर इसे जबरन क्यों थोपा जा रहा है? बिना भुगतान के सेवा लेना हमारे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने साफ किया कि जब तक सरकार भुगतान की कोई लिखित नीति नहीं बनाती, वे इन आदेशों को नहीं मानेंगे।
लॉ स्टूडेंट की मुहिम और हाईकोर्ट का रुख
यह पूरा विवाद तब और गरमाया जब हिसार की एक लॉ स्टूडेंट पूजा बिश्नोई ने इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू की। करीब सात महीने पहले हिसार कोर्ट ने पूजा की याचिका पर सुनवाई कर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था कि जब तक पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से कोई स्थगन आदेश (Stay) नहीं आता, तब तक निजी बसों में भी सरकारी पास मान्य रहेंगे।
हालांकि निजी बस संचालकों ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में गुहार लगाई हुई है, लेकिन अभी तक उन्हें कोई राहत या स्टे नहीं मिला है। इसी अदालती रुख को आधार बनाकर अब सरकार ने प्रशासनिक आदेश जारी कर दिए हैं।
शिकायत पर होगी कड़ी कार्रवाई
परिवहन विभाग के अधीक्षक बलजिंदर सिंह के अनुसार विभाग के पास ऐसी ढेरों शिकायतें आ रही थीं जिनमें बताया गया कि निजी बस कर्मी छात्रों और बुजुर्गों को देखकर बस नहीं रोकते या उनके साथ अभद्रता करते हैं। जनहित को सर्वोपरि रखते हुए अब इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ परमिट रद्द करने जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।










