धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की पिपली अनाज मंडी किसान मजदूर जन क्रांति रैली के उद्घोष से गूंज उठी। भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापारिक समझौते (Trade Deal) और प्रदेश में कथित धान घोटाले के विरोध में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में किसान यहां एकत्रित हुए। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने कुरुक्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और भारी पुलिस बल के साथ वज्र वाहन तैनात किए गए।
चढूनी बोले- रोका तो नतीजे अच्छे नहीं होंगे
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने वीडियो कॉल के माध्यम से रैली को संबोधित करते हुए प्रशासन को सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से चल रही इस रैली में बाधा न डालें। चढूनी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि किसानों को कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से रोका गया, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी। साथ ही उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पुलिस के साथ किसी भी प्रकार की बहस या टकराव में न उलझें और संयम बनाए रखें।
खेतों के रास्ते पैदल पहुंचें, पर रैली न छोड़ें
किसान नेता चढूनी ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि पुलिस चाहे लाठीचार्ज करे या गिरफ्तारी, किसी को भी पीछे नहीं हटना है। उन्होंने आह्वान किया कि यदि मुख्य रास्तों पर पुलिस की नाकेबंदी हो, तो किसान खेतों के रास्ते पैदल चलकर पिपली पहुंचें। उन्होंने भारत-यूएस ट्रेड डील को किसानों के भविष्य और देश की कृषि व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बताया और कहा कि यह समझौता खेती-किसानी को बर्बाद कर देगा।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और ट्रैफिक डायवर्जन
रैली की संवेदनशीलता को देखते हुए कुरुक्षेत्र पुलिस पूरी तरह सतर्क है। पिपली अनाज मंडी के मुख्य द्वारों पर पुलिस ने मजबूत बैरिकेडिंग की है और आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस लाइन में अतिरिक्त फोर्स को रिजर्व रखा गया है। इसके अलावा, रोडवेज की बसों को भी बैकअप के तौर पर तैयार रखा गया है।
देश भर से उमड़ा किसानों का सैलाब
सुबह से ही पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसान जत्थों के रूप में कुरुक्षेत्र पहुंचने शुरू हो गए थे। हाथों में यूनियन के झंडे और सरकार विरोधी नारे लिखी तख्तियां लिए किसान भारी संख्या में पिपली मंडी में जमा हैं। किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे अपनी आजीविका और जमीन की रक्षा के लिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।
जांच के घेरे में धान घोटाला
अमेरिकी ट्रेड डील के अलावा, इस रैली में हरियाणा के स्थानीय मुद्दों, विशेषकर कथित धान घोटाले को लेकर भी सरकार को घेरा जा रहा है। किसान संगठनों का आरोप है कि पारदर्शी व्यवस्था के अभाव में किसानों का शोषण हो रहा है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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