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EPF Pension: हरियाणा में लगभग सवा लाख कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें ईपीएफ की पेंशन राशि राज्य में वृद्धा पेंशन से भी कम है। मजदूर संघ ने वित्त मंत्री के नाते मुख्यमंत्री को बजट पर सुझाव पत्र सौंपा है।  

EPF Pension: हरियाणा में लगभग सवा लाख कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें ईपीएफ की पेंशन राशि, वृद्धा पेंशन से भी काफी कम है। सीएम मनोहर लाल की सरकार राज्य में तीन हजार रुपये मासिक वृद्धा पेंशन दे रही है। वहीं, ईपीएफ से पेंशन की राशि एक हजार रुपये से लेकर दो हजार रुपये महीने तक ही मिल पा रही है।

भारतीय मजदूर संघ ने सीएम मनोहर लाल को बजट पर एक सुझाव पत्र सौंपा है, जिसमें यह मांग की गई है कि जिन कर्मचारियों को ईपीएफ पेंशन, वृद्धा पेंशन से भी कम मिल रही है। उन कर्मचारियों को वृद्धा पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए।

सीएम को भेजे ये सुझाव

भारतीय मजदूर क्षेत्र के संगठन ने पहले सुझाव में कहा कि आउटसोर्सिंग पॉलिसी-2 के तहत सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को चिरायु आयुष्मान योजना में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही ऐसे कच्चे कर्मचारी जो, सरकार के प्रत्यक्ष रोल पर कार्यरत हैं, उन्हें महंगाई भत्ते के लाभार्थियों की श्रेणी में शामिल किया जाए।

भारतीय मजदूर संघ ने कहा है कि सभी कर्मचारियों को 58 साल की उम्र तक रोजगार की सुरक्षा दी जाए। पॉलिसी पार्ट-1 और पार्ट-2 तथा हरियाणा कौशल रोजगार निगम के अंतर्गत काम करने वाले सभी कर्मचारियों को एलटीसी एवं ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए। बोनस कानून के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान जरूरी है। सभी स्कीम वर्कर्स के अंतर्गत काम करने वाले कामगारों के लिए राज्य सरकार को सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था संबंधी पॉलिसी की व्यवस्था बजट में शामिल करनी चाहिए।

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ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों का विस्तार जरूरी

मजदूर संघ ने ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों के विस्तार की जरूरत बताते हुए कहा कि इससे गांव के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा और काम के लिए उन्हें शहरों में पलायन नहीं करना पड़ेगा। पैक्स सोसाइटियों को मजबूत करने के लिए ऋण वसूली की ठोस योजना बनाने का अनुरोध भी भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने सरकार से किया है। न्यूनतम वेतन मजदूरी फॉर्मूला में बदलाव कर छह व्यक्तियों पर आधारित कंपनी में न्यूनतम वेतन का प्रावधान शामिल करने के लिए कहा है। वहीं, मजदूर संघ ने ये भी कहा है कि राज्य सरकार को पुरानी पेंशन नीति फिर से लानी चाहिए।

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