भीषण गर्मी की शुरुआत से पहले दिल्लीवासियों के लिए राहत की खबर है। दिल्ली में गहराते पेयजल संकट को दूर करने के लिए हरियाणा सरकार 30 क्यूसेक अतिरिक्त कच्चा पानी देने पर सहमत हो गई है। इसके बदले दिल्ली सरकार हरियाणा को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध कराएगी।
क्या है जल आपूर्ति का नया फॉर्मूला?
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार, हरियाणा के साथ 'पानी के बदले पानी' के मॉडल पर बातचीत चल रही है:
- दिल्ली को क्या मिलेगा: हरियाणा अपनी मूनक नहर और यमुना के जरिए 30 क्यूसेक अतिरिक्त कच्चा पानी दिल्ली को देगा।
- हरियाणा को क्या मिलेगा: दिल्ली सरकार अपने एसटीपी से साफ किया गया पानी हरियाणा को देगी, जिसे राज्य सरकार सिंचाई कार्यों के लिए इस्तेमाल कर सकेगी।
- यूपी से भी उम्मीद:इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार से भी उपचारित पानी के बदले गंगा जल लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- मूनक नहर की मरम्मत: पानी बर्बादी रोकने की चुनौतीदिल्ली की जलापूर्ति का 60 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा की मूनक नहर से आता है।102 किमी लंबी नहर: करनाल स्थित मूनक हेडवर्क्स से दिल्ली के हैदरपुर प्लांट तक आने वाली इस नहर में कई जगह रिसाव है।
- 30% बर्बादी: नहर क्षतिग्रस्त होने के कारण लगभग 30 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। यदि इसे ठीक कर लिया जाए, तो दिल्ली को पूरा 330 क्यूसेक पानी मिल सकेगा, जिससे किल्लत काफी हद तक कम हो जाएगी।
मूनक नहर: दिल्ली की 'लाइफलाइन'
उत्तर भारतीय राज्यों के बीच जल बंटवारे के तहत, हरियाणा दिल्ली को कैरियर लिंक नहर और दिल्ली सब-ब्रांच के माध्यम से लगभग 1133 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराता है। वर्तमान में हो रही बातचीत का उद्देश्य इसी आपूर्ति को और बढ़ाना और लीकेज को कम करना है।
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