झज्जर जिले की बहादुरगढ़ पुलिस ने शिशुओं की तस्करी करने वाले सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस की गिरफ्त में आए इस गिरोह ने अब तक 50 से ज्यादा दुधमुंहे बच्चों की जिंदगी का सौदा किया है। इस मामले में पुलिस ने एक महिला समेत 11 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। हालांकि, इस पूरे काले कारोबार का मास्टरमाइंड 'लाडी' अभी भी कानून की पहुंच से दूर है।
गरीब और मजबूर परिवारों से खरीदते थे
क्राइम ब्रांच के एसीपी प्रदीप नैन ने बताया कि यह गिरोह बहुत ही संगठित तरीके से काम कर रहा था। ये लोग गरीब और मजबूर परिवारों से नवजात बच्चों को मात्र 2 से 2.25 लाख रुपये में खरीद लेते थे। इसके बाद इन बच्चों को उन संपन्न लेकिन निसंतान दंपतियों को निशाना बनाया जाता था, जो संतान सुख के लिए तरस रहे थे। गिरोह एक-एक बच्चे की कीमत 9 से 10 लाख रुपये तक वसूलता था। यह महज अपराध नहीं, बल्कि मासूमों की जान की बोली लगाकर मोटा मुनाफा कमाने वाली एक 'बेबी फैक्ट्री' की तरह काम कर रहा था।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मासूमों की नुमाइश
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि तस्करी के इस धंधे के लिए आरोपी आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे थे। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया माध्यमों पर ये लोग सक्रिय थे। वहां ये निसंतान दंपतियों से संपर्क साधते और उन्हें गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया के बजाय 'शॉर्टकट' से बच्चा दिलाने का लालच देते थे। डिजिटल दुनिया के जरिए इन्होंने अपना जाल कई राज्यों में फैला रखा था।
अपने ही माता-पिता ने किया खून का सौदा
इस पूरे प्रकरण का सबसे हृदयविदारक पहलू यह है कि पुलिस ने उन पिताओं को भी गिरफ्तार किया है, जिन्होंने चंद रुपयों की खातिर अपने ही जिगर के टुकड़ों को इन तस्करों के हवाले कर दिया था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 2 नवजात शिशुओं को बरामद करने में सफलता हासिल की है। इन बच्चों को फिलहाल बाल संरक्षण विभाग की सुपुर्दगी में दिया गया है, जहां उनकी उचित देखभाल की जा रही है।
6 राज्यों तक फैला है तस्करी का नेटवर्क
गिरोह के पकड़े गए सदस्यों से पूछताछ में पता चला है कि इनके तार केवल हरियाणा तक सीमित नहीं थे। यह नेटवर्क दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में फैला हुआ था। पुलिस ने इनके पास से दो वाहन और कई ऐसे कागजात बरामद किए हैं, जो फर्जी गोद लेने की प्रक्रियाओं और सौदेबाजी से जुड़े हैं।
सरगना की तलाश और नेटवर्क पर प्रहार
पुलिस के अनुसार गिरोह का मुख्य संचालक 'लाडी' पंजाब का रहने वाला है और वह फिलहाल फरार है। पुलिस की विशेष टीमें उसे पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि सरगना की गिरफ्तारी के बाद कई बड़े अस्पतालों और दलालों के नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस का संकल्प है कि इस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी मासूम की जिंदगी का सौदा न हो सके।
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