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Haryana: हरियाणा में सेवानिवृत्ति के बाद लगे चिकित्सकों को मरीज देखने होंगे, ना कि वे प्रशासनिक काम कर सकेंगे। इस बारे में शिकायत राज्य की सरकार और मुख्य सचिव तक पहुंच गई हैं। इतना ही नहीं, मामले में डीजी हेल्थ से एसीएस ऑफिस ने जवाब तलब कर लिया है। भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन द्वारा भी आला अफसरों द्वारा उठाए जा रहे कदमों को उचित बताया और कहा कि वर्किंग करने वाले डाक्टरों को ही अहम फाइलों का जिम्मा दिया जाना चाहिए, क्योंकि भ्रष्टाचार के शिकायतें लगातार राज्य सरकार के पास जा रहीं हैं। इस तरह से रिटायर होकर री इंप्लॉयमेंट लेने वाले सीनियर कंसलटेंट विभाग में क्लीनिकल काम ही कर पाएंगे।
सेठी की नियुक्ति और काम को लेकर चल रही चर्चा
सेवानिवृत्त डेंटल निदेशक डॉ. प्रवीण सेठी के बारे में शिकायत को लेकर राज्य सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने यह संज्ञान ले लिया है। पालिसी का हवाला देते हुए पत्र में एसीएस ने कहा कि तुरंत प्रभाव से डॉ. सेठी से प्रशासनिक काम को वापस लेकर उनको केवल क्लीनिकल कार्य ही दिया जाए। एसीएस ने महानिदेशक से इस संबंध में तीन दिन में एक्शन टेशन रिपोर्ट तलब की है। सिरसा ऐलनाबाद निवासी अर्जुन मेघवाल ने हरियाणा सरकार को शिकायत दर्ज कराई थी।
डॉ. प्रवीन सेठी सेवानिवृत्ति के बाद सीनियर कंसलटेंट लगे
दरअसल, डॉ. प्रवीन सेठी पहले डेंटल निदेशक के पद पर तैनात थे, सेवानिवृत्ति के बाद सरकार की पालिसी के तहत उनको सीनियर कंसलटेंट लगाया है। पालिसी में साफ है कि सीनियर कंसलटेंट को केवल और केवल क्लीनिकल कार्य ही दिया जा सकेगा और वह केवल मरीजों को देखेंगे, लेकिन प्रदेश में कई सीनियर कंसलटेंट प्रशासनिक कार्यों का जिम्मा संभाले हुए हैं। इसका असर ये है कि जिस डॉक्टर को ओपीडी में होना चाहिए, वह प्रशासनिक कार्य में व्यस्त रहते हैं और इससे मरीजों की परेशानी बढ़ती है। शिकायतों के बाद सरकार ने यह संज्ञान लिया है।
