साइबर अपराधियों ने अब सरकारी अधिकारियों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा मामला हरियाणा के हिसार से सामने आया है, जहां कैथल के कृषि विभाग में कार्यरत एक इंस्पेक्टर को फेसबुक पर 'दोस्ती' करना महंगा पड़ गया। ठगों ने एक युवती के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर इंस्पेक्टर को अपने जाल में फंसाया और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर उनसे करीब 40 लाख रुपये ऐंठ लिए।
फेसबुक पर बिछाया जाल
हिसार के सेक्टर-16 के निवासी 40 वर्षीय घनश्याम, जो वर्तमान में कैथल में कृषि विभाग के इंस्पेक्टर हैं। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में इस पूरी साजिश का खुलासा किया है। पीड़ित के अनुसार 20 फरवरी को उनकी फेसबुक आईडी पर 'रेखा यादव' नामक प्रोफाइल से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच मैसेंजर पर सामान्य बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे भरोसा बढ़ा और दोनों ने एक-दूसरे के मोबाइल नंबर साझा कर लिए, जिसके बाद बातचीत व्हाट्सएप पर होने लगी।
मुनाफे की 'पहली किश्त' से जीता भरोसा
व्हाट्सएप पर चैटिंग के दौरान आरोपी ने खुद को निवेश विशेषज्ञ बताते हुए इंस्पेक्टर को 'ग्लोबल प्राइम' नामक एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के बारे में बताया। शुरुआत में घनश्याम ने निवेश से इनकार किया, लेकिन बार-बार दबाव डालने और बड़े मुनाफे का लालच देने पर वे तैयार हो गए।
ठगों ने अपनी चाल के तहत पहले उनसे 50 हजार रुपये निवेश करवाए। विश्वास जीतने के लिए कुछ ही समय बाद उनके खाते में मुनाफे सहित 53,890 रुपये वापस भेज दिए गए। इस छोटी सी रकम पर मिले मुनाफे ने इंस्पेक्टर को बड़े निवेश के लिए प्रेरित कर दिया, जो अंततः एक बड़ी ठगी का आधार बना।
मां के खाते और RTGS से ट्रांसफर किए लाखों रुपये
एक बार भरोसा जमने के बाद ठगों ने बड़ी रकम का जाल फेंका। रेखा यादव की आईडी से बात कर रहे जालसाजों ने उन्हें 20 लाख रुपये निवेश करने को कहा। घनश्याम ने अपनी माता कृष्णा देवी के पीएनबी (PNB) बैंक खाते से यह राशि ट्रांसफर कर दी। इसके बाद ठगों ने अलग-अलग तकनीकी कारणों का हवाला देकर और 20 लाख रुपये की मांग की। पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में आरटीजीएस (RTGS) के जरिए कुल 40 लाख रुपये आरोपियों के बताए खातों में भेज दिए।
रकम निकालने की कोशिश में खुली पोल
धोखाधड़ी का पता तब चला जब पीड़ित के ट्रेडिंग अकाउंट में भारी मुनाफा दिखने लगा। जब घनश्याम ने अपने खाते से 5 हजार डॉलर निकालने का प्रयास किया, तो वेबसाइट ने एरर दिखाना शुरू कर दिया। ठगों ने तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर उन्हें और ज्यादा ट्रेड करने के लिए मजबूर किया। संदेह होने पर जब पीड़ित ने अपने एक साइबर विशेषज्ञ मित्र से सलाह ली, तब उन्हें अहसास हुआ कि वे एक संगठित साइबर गैंग का शिकार हो चुके हैं।
साइबर थाना पुलिस की जांच शुरू
हिसार साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पीड़ित इंस्पेक्टर की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस उन बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है जिनमें पैसा ट्रांसफर किया गया था। साथ ही, उस आईपी (IP) एड्रेस और फेसबुक प्रोफाइल की भी तकनीकी जांच की जा रही है जिसके जरिए संपर्क साधा गया था। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति के बहकावे में आकर निवेश न करें और वित्तीय लेन-देन से पहले पूरी सावधानी बरतें।
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