दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन तरुण की हत्या को लेकर लोगों का आक्रोश थमता नजर नहीं आ रहा। जगह-जगह गुस्साए लोग प्रदर्शन कर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच आज दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी इस हत्याकांड में शामिल दो आरोपियों के परिजनों की याचिका पर सुनवाई की। उनकी मांग है कि उनके घरों पर बुलडोजर एक्शन नहीं होना चाहिए। साथ ही, सुरक्षा भी मांगी है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति अमित बंसल की कोर्ट ने आरोपियों के परिजनों से उनकी संपत्ति के खिलाफ प्रस्तावित विध्वंस कार्रवाई के खिलाफ बेहतर याचिकाएं दायर करने को कहा है। उच्च न्यायालय ने कहा कि दोनों याचिकाओं में पुलिस सुरक्षा की भी मांग की गई है। अदालत ने कहा कि वह याचिका में केवल पहली मांग पर विचार कर रही है, जिसमें याचिकाकर्ता के घर को एमसीडी द्वारा मनमाने और अवैध विध्वंस से बचाने के लिए निर्देश की मांग की गई है, जो कि कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना और सुप्रीम कोर्ट द्वारा री: डायरेक्शंस ऑफ डिमोलिशन इन द मैटर ऑफ डिमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर्स (2024) में दिए गए दिशानिर्देशाों के खिलाफ है।
याचिकाकर्ताओं को धमकियों पर क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने आरोपियों के परिजनों की सुरक्षा का सवाल उठाया। न्यायालय ने मौखिक रूप से कहा कि यह पूरी तरह से अलग मामला है। इस न्यायालय का अधिकार क्षेत्र अनाधिकृत निर्माण, अतिक्रमण और विध्वंस से संबंधित है। हमारे अधिकार क्षेत्र में पुलिस सुरक्षा प्रदान करना नहीं आता है।
याचिकाएं वापस लेने का आग्रह, कोर्ट ने दी इजाजत
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में पूरी तरह से अलग-अलग कारण बताए गए हैं। याचिकाकर्ताओं को बेहतर याचिकाएं दायर करने को कहा। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने एक सप्ताह के भीतर बेहतर विवरण वाली नई याचिकाएं दाखिल करने की स्वतंत्रता के साथ वर्तमान याचिका वापस लेने का आग्रह किया। इस पर हाईकोर्ट ने इस आग्रह को स्वीकारते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया।
आरोपियों के घरों पर नहीं चलेगा बुलडोजर
यद्यपि याचिकाएं वापस ले ली गई हैं। ऐसे में अदालत ने संपत्तियों पर विध्वंस कार्रवाई के खिलाफ संरक्षण प्रदान करने का कोई आदेश पारित नहीं किया है। लेकिन, नगर निकाय के वकील ने अदालत के समक्ष दोनों याचिकाओं से संबंधित संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया है। बता दें कि मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी को मौखिक निर्देश देकर आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी। साथ ही, आज के लिए इस मामले को सूचीबद्ध कर दिया था।
'बेटे को न्याय मिलने तक सो नहीं पाएंगे'
तरुण की हत्या 4 मार्च को होली के दिन हुई थी। इस वारदात को एक सप्ताह हो गया है, लेकिन लोगों में गुस्सा देखा जा रहा है। तरुण के पिता हेमराज ने बताया कि परिवार भी इस सदमे से उबर नहीं पाया है और न ही कभी उबर पाएगा। उन्होंने कहा कि नींद भी नहीं आती। सोता हूं तो ऐसा लगता है, जैसे बेटा आवाज लगा रहा हो। उन्होंने कहा कि जब तक उनके बेटे को न्याय नहीं मिलता, तब तक नींद कैसे आएगी। पुलिस ने अभी तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सीसीटीवी में 22 लोग नजर आए हैं। हमने सभी के नाम पुलिस को दिए हैं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की हत्या में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए ताकि भविष्य में हमारी तरह किसी को अपना बेटा खोना न पड़े।










