अयोध्या के रहने वाले देवकीनंदन पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर बाबर या बाबरी के नाम से मस्जिद के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी। जानिये सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने बाबर के नाम पर मस्जिद बनाने का विरोध करने वाली याचिका सुनने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि बाबर विदेशी आक्रांता था, उसके नाम पर देश में कहीं भी मस्जिद नहीं बननी चाहिए। लेकिन माननीय सर्वोच्च न्यालय ने इस याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया कि इस फैसले के साथ बाबर के नाम पर मस्जिद बनाने या न बनाने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो गई है। 

उत्तर प्रदेश के अयोध्या के रहने वाले देवकीनंदन पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। याचिकाकर्ता ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम से इमारत के निर्माण की जानकारी दी थी। कहा था कि इससे सांप्रदायिक सौहार्द के बिगड़ने की आशंका है। याचिकाकर्ता ने देशभर में बाबर के नाम पर या बाबरी के नाम पर मस्जिद न बनाने के आदेश जारी करने की अपील की थी।

इसके अलावा सभी राज्यों को भी निर्देश देने की मांग की थी कि वे अपने यहां इस तरह के गाइडलाइंस, एडवाइजरी या प्रशासनिक आदेश जारी कर बाबर या किसी दूसरे विदेशी आक्रांता के नाम पर मस्जिद या धार्मिक इमारत बनाने पर रोक सुनिश्चित हो। 

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सुप्रीम कोर्ट में आज जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच में यह मामला सुनवाई के लिए लगा। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील ने दलील दी कि बाबर एक विदेशी आक्रांता था, वह हिंदुओं को गुलाम कहता और अत्याचार करता। जो लोग उसका सम्मान करना चाहते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनने से मना कर दिया है।