Saurabh Bhardwaj: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने अपनी याचिका में आबकारी नीति मामले से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग उठाई थी।
लेकिन इस याचिका को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खारिज करते हुए कहा है कि वह केस से अलग नहीं होंगी, और शराब घोटाले केस को लेकर अपनी सुनवाई जारी रखेंगी। इसे लेकर AAP नेता सौरभ भारद्वाज द्वारा प्रतिक्रिया दी गई है, अपने बयान में उन्होंने कहा है कि हमने अपनी आशंका जताई थी लेकिन अगर वो सुनवाई करना चाहती हैं, तो ठीक है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ भारद्वाज ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के केस की सुनवाई जारी रखने के फैसले पर कहा कि "किसी भी जज से ये अपील की जाती है कि आप इस केस से अलग हो जाएं। इसमें आपको ये साबित नहीं करना होता कि जज पक्षपाती है। इसमें बस ये बताना होता है कि पार्टी के मन में आशंका है कि उसे न्याय नहीं मिलेगा। "
अरविंद केजरीवाल ने बताई 10 वजह-सौरभ भारद्वाज
उन्होंने कहा कि इस केस में अरविंद केजरीवाल ने अपने डर को लेकर 10 वजह कोर्ट के सामने रखी थीं, जिसमें उन्होंने कहा था कि इन वजहों से मेरे मन में मुझे आशंका है कि,यहां न्याय नहीं मिलेगा। जस्टिस स्वर्णा कांता जी ने कहा कि नहीं, आपको यहीं न्याय मिलेगा। मैं ही आपका केस सुनूंगी, मैं ही आपको न्याय दूंगी. लिहाजा अब वो ही इस मामले की सुनवाई करेंगी।
VIDEO | As Delhi High Court judge Swarana Kanta Sharma refused to recuse herself from hearing the liquor-policy case, Delhi AAP chief Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) says, "Any judge can be requested to step aside from the case, not to prove that the judge is biased, but to… pic.twitter.com/7vChQPxAUH
— Press Trust of India (@PTI_News) April 20, 2026
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के फैसले पर सौरभ भारद्वाज ने क्या कहा ?
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसमें कुछ बातें अजीब हैं, जैसे उन्होंने बताया कि 2022 में, राउज़ एवेन्यू के खास CBI कोर्ट में जस्टिस गीतंजलि गोयल थीं, जब उन्होंने ED से कुछ सख्त सवाल पूछ लिए कि क्राइम क्या है? सबूत क्या है?
तो ED घबरा गई और ED ने ऊपर की अदालत में जाकर बोला कि हमें यहां न्याय की उम्मीद नहीं है, और फिर ईडी यानी केंद्र सरकार ने जज साहिबा का बदलवा दिया। जब आप बिना किसी वजह जज को बदललवा सकते थे, तो यहां तो उचित डर के साथ ये बात रखी गई थी।
उन्होंने आगे कहा कि जज ने ये बात भी बड़ी अजीब कही कि कोई जज है, उनके बच्चे क्या वकील नहीं बन सकते हैं। ये उनका मौलिक अधिकार है, लेकिन, अरविंद केजरीवाल ने उनके जज बनने पर सवाल नहीं उठाया. उन्होंने तो कहा कि वकील तो वो हैं लेकिन वो केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट के पैनल पर है।
इन सब दलीलों से ऐसा लगता है कि आपके बच्चे उन्हीं तुषार मेहता जी के अधीन काम करते हैं जिन्हें वो केस मार्क करते हैं, जो पैनल के अधीन वकील लगाए जाते हैं, हम सब जानते है कि वो कैसे लगते हैं, उसके लिए कोई टेस्ट तो होता नहीं है, इसमें तो सरकार का मत होता है किसे बनाते हैं किसे नहीं बनाते हैं।
आप नेता ने कहा कि जहां तक अधिवक्ता परिषद की बैठकों में जाने की बात है तो अलग-अलग पार्टियों के वकीलों की विंग है। कांग्रेस की भी है, आम आदमी पार्टी की भी है। सभी में जजों को जाना चाहिए, इससे संस्था की निष्पक्षता पर और सवाल खड़े होंगे। ये जज साहिबा का फैसला है वो खुद ही केस सुनना चाहती है तो जैसा उनका फैसला है।
केजरीवाल ने चीफ जस्टिस को लिखा था लेटर
आप नेता अरविंद केजरीवाल ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लेटर लिखकर मांग उठाई थी उनके केस को जज स्वर्ण कांता शर्मा से लेकर किसी और बेंच को ट्रांसफ़र कर दिया जाए। चीफ जस्टिस ने इस मांग को खारिज कर दिया तो उन्होंने, सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया इसके साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके जज स्वर्ण कांत से अपील करते हुए कहा था कि वो ख़ुद को इस मामले से अलग कर लें। लेकिन, अब उन्होंने इस अपील को ख़ारिज कर दिया है।









