दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को 'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही, अंद्राबी की सहयोगी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30 साल जेल की सजा सुनाई गई है। आसिया अंद्राबी की वकील एडवोकेट निशा नारायण का कहना है कि उन्होंने कभी भी आतंकवादी कृत्य नहीं किया है, फिर भी उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। उन्होंने इस फैसले के पीछे की वजह भी बताई है।
मीडिया से बातचीत में एडवोकेट एडवोकेट निशा नारायण ने कहा कि आसिया अंद्राबी को आंदोलन की अध्यक्ष होने के कारण आजीवन कारावास की सजा दी गई है। सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को इस मामले में 30 साल की सजा दी गई है। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला ऐसे विचार और उद्देश्य का प्रचार करने वाला है, जो कश्मीरियों के मन को शत्रुतापूर्ण तरीके से प्रभावित कर रहा था। साथ ही, देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा था।
उन्होंने आगे कहा कि यह विचार देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा था। वे कश्मीर की आजादी के लिए आवाज उठा रही थीं, जो देश के हित के खिलाफ है। अदालत ने भी कहा कि उकसावे के अलावा कोई आतंकवादी कृत्य नहीं किया गया है।
#WATCH | Delhi | Advocate Nisha Narayan, Counsel for Kashmiri separatist Asiya Andrabi, who has been sentenced to life imprisonment, says, "Aasiya Andrabi has been awarded the life sentence for being the chairperson of the movement. Sofi Fehmida and Naheeda Nasrin have been… pic.twitter.com/mHOc35ZF27
— ANI (@ANI) March 25, 2026
एनआईए की विशेष अदालत ने दिया था फैसला
एनआईए की विशेष अदालत ने यह फैसला सुनाया था। अतिरिक्त सेशन्स जज चंद्र जीत सिंह ने आसिया अंद्राबी को 'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत दोषी ठहराकर आजीवन कारावास और उसकी सहयोगी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को दोषी घोषित करते हुए 30 साल जेल की सजा सुनाई है। अंद्राबी, फहमीदा और नाहिदा को 14 जनवरी को यूएपीए की धारा 20, 38 और 39 के साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए, 153 बी, 120 बी, 505 और 121 ए के तहत दोषी ठहराया गया था।
बता दें कि आसिया अंद्राबी दुख्तरान-ए-मिल्लत की संस्थापक और प्रमुख है। उनकी उम्र करीब 64 वर्ष है। दुख्तरान-ए-मिल्लत एक अलगाववादी संगठन है। इस संगठन को महिलाओं को केंद्रित करके बनाया गया है। शुरू में इसे सामाजिक और धार्मिक आंदोलन के तौर पर दर्शाया गया, लेकिन संदिग्ध गतिवधियों के चलते 2018 में केंद्र सरकार ने इस पर बैन लगा दिया था। आसिया अंद्राबी ने 1990 में आसिया ने आशिक हुसैन फकतू से शादी की थी। फकतू भी आतंकी कमांडर है, जो कि आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।










