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Delhi Excise Policy Case: दिल्ली आबकारी मामले में पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया दिल्ली हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को केस से हटाने का आग्रह किया है।

Delhi Excise Policy Case: दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल के बाद अब पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को केस से हटाने की मांग उठाई है। इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा। 

बता दें कि सोमवार 6 अप्रैल को भी मामले को लेकर सुनवाई हुई थी। उस दौरान दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली हाई कोर्ट में व्यक्तिगत तौर पर पेश हुए थे। उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी नीति मामले में उन्हें और दूसरे सभी आरोपियों को आरोप मुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ CBI की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से अलग किए जाने का आग्रह किया था। 

हाई कोर्ट ने दिया 10 अप्रैल तक का समय

हाई कोर्ट  का कहना है कि  अरविंद केजरीवाल के अलावा AAP के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर और अरुण रामचंद्र पिल्लई समेत अन्य  प्रतिवादियों ने भी जस्टिस शर्मा को सुनवाई से अलग किए जाने के आग्रह को लेकर आवेदन दाखिल किए हैं। इसे लेकर कोर्ट ने केजरीवाल और दूसरे प्रतिवादियों को CBI की मुख्य याचिका पर जवाब देने के लिए 10 अप्रैल तक का आखिरी समय दिया है।  

कोर्ट कोई नौटंकी का मंच नहीं- तुषार मेहता

CBI की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील देते हुए कहा कि 'कोर्ट कोई नौटंकी का मंच नहीं है, और अगर केजरीवाल मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होना चाहते हैं, तो उन्हें अपने वकील को हटा देना चाहिए। यह पहली बार नहीं है, जब केजरीवाल ने अदालती कार्यवाही में खुद दलीलें पेश की हों।'

उन्होंने आगे कहा कि 'इस देश में कुछ लोग हर किसी पर बेबुनियाद आरोप लगाना अपना पेशा बना लेते हैं, इसे गंभीरता से लेना होगा. यह संस्था के खिलाफ आरोप है और हमें उस संस्था का समर्थन करना होगा।' तुषार मेहता ने हाई कोर्ट से कहा कि आरोपमुक्त किए गए 7 आरोपियों ने योजना के तहत जस्टिस शर्मा को इस मामले की सुनवाई से अलग करने के अनुरोध को लेकर अदालत का रुख किया है। 

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