AI Summit Protest Case: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट मामले की सुनवाई कर रही है। दिल्ली पुलिस की तरफ से एएसजी डीपी सिंह पैरवी कर रहे हैं।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट एआई शिखर सम्मेलन के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में मनीष शर्मा और राजीव कुमार की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। दिल्ली पुलिस की तरफ से एएसजी डीपी सिंह पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एआई शिखर सम्मेलन का उद्देश्य यूरोपीय संघ सहित 100 से अधिक देशों द्वारा एआई पर एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करना था। पुलिस का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई थी, इसलिए आरोपियों की भूमिका की जांच करना महत्वपूर्ण है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि मनीष शर्मा एआई समिट में शर्टलेस विरोध प्रदर्शन की योजना बनाने के पीछे मुख्य साजिशकर्ता थे। उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया। पिछली सुनवाई के दौरान मनीष शर्मा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने तर्क दिया कि यह मामला राजनीतिक है, जो कि पुलिस द्वारा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपियों का विरोध प्रदर्शन था। प्रदर्शन करने वाले आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि मनीष शर्मा विरोध प्रदर्शन में मौजूद नहीं थे। पुलिस का आरोप है कि वह एक प्रमुख साजिशकर्ता थे। पुलिस कह रही है कि उनकी प्रदर्शन करने की योजना, रसद मुहैया कराने आदि में उनकी भूमिका थी। पुलिस के पास उनके खिलाफ सभी सबूत हैं, फिर पुलिस उनकी हिरासत में पूछताछ क्यों चाहती है?

दोनों पक्षों में तीखी बहस
इसके बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से एएसजी डीपी सिंह, अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) अतुल श्रीवास्तव और प्रशांत प्रकाश पेश हुए और अग्रिम जमानत याचिकाओं का विरोध किया। एएसजी डीपी सिंह ने तर्क दिया कि मनीष शर्मा भारतीय युवा कांग्रेस के प्रभारी हैं। इस मामले में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता का पता लगाने के लिए उनकी हिरासत आवश्यक है। इस रमेश गुप्ता ने इस तर्क का विरोध किया। पूछा कि क्या भारतीय युवा कांग्रेस एक प्रतिबंधित संगठन है। क्या भारतीय कांग्रेस का सदस्य होना अपराध है। इस पर एएसजी डीपी सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता के बीच तीखी बहस हुई। अदालत के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ, जिसके बाद सुनवाई शनिवार यानी आज तक के लिए स्थगित कर दी थी। आज की सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ, जानकारी मिलते ही खबर अपडेट की जाएगी। 

दिल्ली के भारत मंडपम में 20 फरवरी 2026  को एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस ने शर्टलेस प्रदर्शन किया था। रिपोर्ट के अनुसार, यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हॉल में प्रवेश करके अपनी शर्ट निकाली और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस कारण कार्यक्रम में कुछ समय के लिए व्यवधान पड़ गया। प्रदर्शनकारियों को बाहर निकालने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में ले लिया। मामला तब गरमाया, जब पुलिस ने यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानू चिब को अरेस्ट कर लिया। 

कांग्रेस का कहना था कि उदय भानू प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद नहीं थे, फिर भी उन्हें अरेस्ट कर लिया गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि बीजेपी पूरे देश में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है। यह मोदी सरकार की तानाशाही है, जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में उदय भानू चिब को 28 फरवरी को मजिस्ट्रेट कोर्ट से जमानत मिली थी, लेकिन 28 फरवरी को ही सेशन कोर्ट ने जमानत पर रोक लगाकर तिहाड़ भेज दिया था। इस पर फिर से सियासत गरमा गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 मार्च को चिब को जमानत पर लगी रोक हटा दी थी।