Delhi Metro: दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर सामने आई है। इसे लेकर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) द्वारा यात्रियों के अनुभव को और भी बेहतर करने के लिए ब्लू लाइन की पुरानी ट्रेनों के मिड-लाइफ रिफर्बिशमेंट (MLR) का बड़ा अभियान शुरू कर दिया गया है। इसके तहत सालों पुरानी ट्रेनों को आधुनिक तकनीक और नई सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर मिल सके।
DMRC के प्रधान कार्यकारी निदेशक कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस अनुज दयाल का कहना है कि, इस अभियान में रेड और ब्लू लाइन की कुल 70 ट्रेनों को नवीनीकरण करने का फैसला लिया गया है, अब तक 31 ट्रेनों का अपग्रेड पूरा किया जा चुका है।
पहले फेज में 12 और दूसरे फेज में 18 ट्रेनों को आधुनिक बनाया जा चुका है। लेकिन अगले फेज में भी शेष ट्रेनों पर काम जारी रहेगा। तीसरे फेज में नवंबर 2027 तक ब्लू लाइन की 22 ट्रेनों को आधुनिक किया जाएगा।
नए मानकों के तहत अपग्रेड होगी मेट्रो
अनुज दयाल के मुताबिक 2002 से 2007 के बीच शामिल की गई ये ट्रेनें 20 से 24 साल की सर्विस दे चुकी हैं। ऐसे में इन ट्रेनों को नए मानकों के तहत अपग्रेड करना जरूरी है, ताकि उनकी विश्वसनीयता बनी रहे, और यात्रियों को भी बेहतर सुविधा मिलती रहें।
रिफर्बिशमेंट के दौरान ट्रेनों के अंदरूनी हिस्सों में व्यापक बदलाव किए गए हैं। कोच और चालक केबिन को नए सिरे से पेंट किया गया है। इसके अलावा टूट-फूट की भी मरम्मत भी की गई है। इलेक्ट्रिक पैनलों को भी अपग्रेड किया गया है।
यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक यात्री उद्घोषणा व सूचना प्रणाली लगाई गई है, जिसमें एलसीडी स्क्रीन, डायनेमिक रूट मैप और सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं। इन सिस्टम से यात्रियों को रूट, समय और अगले स्टेशनों की रियल-टाइम जानकारी मिलेगी। इसके अलावा आपात स्थिति में ट्रेन ऑपरेटर से संपर्क की सुविधा भी मिल सकेगी।
नए फायर डिटेक्शन सिस्टम की सुविधा
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी कोचों में स्मोक और टेंपेरेचर सेंसर आधारित नए फायर डिटेक्शन सिस्टम भी लगाए गए हैं। पुराने इलेक्ट्रिकल उपकरणों जैसे रिले और MCB को भी अत्याधुनिक तकनीक से बदला गया है, ताकि संचालन ज्यादा सुरक्षित हो सके।
मोबाइल व लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट्स भी लगाए गए हैं। DMRC का कहना है कि इस पहल के माध्यम से पुरानी ट्रेनों को नई ट्रेनों के बराबर सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को मेट्रो में अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और आरामदायक सफर मिल सके।