Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस में जुलूस, रैलियां, विरोध-प्रदर्शन और सार्वजनिक सभाओं पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को गलत बताया है। अदालत का स्पष्ट मत है कि इस तरह का ब्लैंकेट बैन नहीं लगाया जा सकता। यह फैसला छात्र उदय भदौरिया की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें DU के प्रॉक्टर द्वारा 17 फरवरी 2026 को जारी नोटिफिकेशन के द्वारा चुनौती दी गई थी। इस नोटिफिकेशन से DU और उसके कॉलेजों में एक महीने के लिए प्रदर्शन, धरना, जुलूस और पांच या इससे अधिक लोगों की सभाओं पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने कहा कि ऐसा पूर्ण प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का उल्लंघन करता है।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का मुख्य काम है। अगर झड़प या हिंसा होने की आशंका है, तो पुलिस रोक के साथ ही बैठक या प्रदर्शन की अनुमति दे सकती है। अदालत ने पूर्ण प्रतिबंध के बजाय वैकल्पिक उपायों पर विचार करने की बात कही। यूनिवर्सिटी के वकील ने दलील दी कि यह रोक दिल्ली पुलिस के नॉर्थ कैंपस में पांच या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर लगी रोक के आधार पर थी, लेकिन कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने DU, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, और मामले को जनहित याचिका के रूप में सुनने का निर्देश दिया।
अदालत ने छात्रों को भी संतुलित रहने की नसीहत दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन इसे शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से करना चाहिए। हिंसा या झड़प की स्थिति में अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। छात्रों को अपनी बात रखने के लिए संवैधानिक प्रावधानों का सम्मान करते हुए जिम्मेदारी से काम करने की सलाह दी गई। यह टिप्पणी UGC नियमों के समर्थन में हुए हालिया प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों के संदर्भ में आई, जिसके बाद प्रतिबंध लगाया गया था।