देश की राजधानी दिल्ली में भी नाबालिग लूट और हत्या जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। यही नहीं, नाबालिग नशीले पदार्थों की डिलीवरी करने जैसी वारदातों में संलिप्त पाए गए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए नाबालिगों को अपराध की तरफ धकेलने वालों के खिलाफ सख्त संदेश दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला की अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज कर दिया है, जिस पर एक नाबालिग बच्चे की तस्करी कर उसे अवैध शराब के कारोबार में लगाने का आरोप है। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चों का शोषण कर उन्हें अपराध के लिए हथियार के तौर पर उपयोग करना समाज के लिए गंभीर खतरा है।
जस्टिस गिरिश कठपालिया की कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हाल के समय में अपराध के लिए बच्चों के शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। कारण यह है कि अपराधी कठोर सजा से बचने के लिए नाबालिग बच्चों को अपराध की ओर धकेल देते हैं ताकि पकड़े जाने पर उन्हें कम से कम सजा मिले। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना समाज को गलत संदेश देना होगा।
दोनों पक्षों ने दी ये दलीलें
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उसकी भूमिका केवल बच्चे को दिल्ली लाने तक सीमित थी। ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे साबित हो सके कि वह उस बच्चे को अवैध शराब की बिक्री के उद्देश्य के लिए लाई थी। उधर, अभियोजन पक्ष ने कहा कि महिला अवैध शराब बिक्री के गिरोह में सक्रिय थी। अवैध शराब की बिक्री के एवज से मिलने वाली राशि भी महिला के पास पहुंचती थी। ऐसे में उसकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार नहीं होनी चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आरोपी महिला के अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। माननीय अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमित जमानत की तुलना में अग्रिम जमानत पर विचार करने के मानदंड अधिक सख्त और सीमित होते हैं। न्यायालय ने आरोपी के पूर्व आपराधिक वारदातों का उल्लेख किया और कहा कि यह जांचना आवश्यक हो गया है कि क्या उसने अन्य बच्चों की इसी तरह से तस्करी की और अपराध की ओर धकेलने का कार्य किया। हाईकोर्ट ने मामले की जांच के लिए उसकी हिरासत में पूछताछ को जरूरी बताते हुए उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।











