Delhi HC Justice Tejas Karia Recuses: दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस तेजस कारिया ने कोर्ट की अवमानना केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।

Delhi HC Justice Tejas Karia Recuses: दिल्ली के पूर्व सीएम और AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से जुड़े एक मामले में नया मोड़ आ गया है। बता दें कि आप के कई नेताओं के खिलाफ अदालत की अवमानना को लेकर कार्रवाई की मांग उठाई थी।

दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस तेजस कारिया ने कोर्ट की अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जिसके चलते केजरीवाल और दूसरे के खिलाफ याचिका पर सुनवाई को टाल दिया गया है। 

दरअसल पूरा मामला कोर्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से जुड़ा है। इस पूरे मामले को आज यानी 22 अप्रैल बुधवार को चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया था। अब इस मामले में अगली सुनवाई कल यानी 23 अप्रैल गुरुवार को होगी।  

याचिका में क्या कहा गया ?

एक्साइज नीति मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर किए गए थे। इस मामले को लेकर वकील वैभव सिंह द्वारा याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसे पब्लिक करना नियमों का उल्लंघन है।

याचिका में मांग उठाई गई है इन वीडियो को सोशल मीडिया से हटाया जाए। इस मामले में अरविंद केजरीवाल समेत रविश कुमार, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अन्य नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।  

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने किया इंकार

बता दें कि सोमवार को आबकारी नीति मामले से हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग करने से इंकार कर दिया था। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के इस फैसले से केजरीवाल और अन्य लोगों की ओर से दायर याचिका खारिज हो गई थी।

मामले में 1 घंटे से ज्यादा हुई सुनवाई में जस्टिस शर्मा ने कहा था कि, "किसी भी वादी को बिना किसी सबूत के जज पर फैसला करने की परमिशन नहीं दी जा सकती। जज किसी वादी के पूर्वाग्रह के निराधार डर को दूर करने के लिए खुद को मामले से अलग नहीं कर सकते हैं।" 

जज पर व्यक्तिगत हमला न्यायपालिका पर हमला-जस्टिस स्वर्ण कांता

"स्वर्ण कांता ने कहा कि किसी राजनीतिक नेता को बिना किसी आधार के किसी संस्था को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि किसी जज पर व्यक्तिगत हमला न्यायपालिका पर ही हमला होता है। जस्टिस शर्मा ने निष्कर्ष निकाला कि उन्हें मामले की सुनवाई से हटाने की याचिकाओं में वर्णित विवरण अनुमानों और कथित झुकावों पर आधारित था। जस्टिस शर्मा ने कहा कि यह अदालत अपने और संस्था के लिए खड़ी रहेगी, मैं खुद को इस मामले से अलग नहीं करूंगी।"