रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 साल में पहुंचकर युवा छत्तीसगढ़ बन गया है, लेकिन इस राज्य में अब 60 वर्ष से अधिक आयु वाले उम्रदराज लोगों की संख्या बढ़ रही है। राज्य में 60 वर्ष से अधिक जनसंख्या वर्ष 2011 के मुकाबले 2026 में 10.5 प्रतिशत पहुंच गई है।
जनसांख्यिकी संरचना के हिसाब से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण संकेतक है। यह स्थिति राज्य में वृद्ध जनसंख्या के बढ़ते हुए अनुपात को दर्शाती है, जो सामाजिक विकास के साथ-साथ शासन व्यवस्था के लिए एक उभरती हुई प्राथमिक चुनौती है एवं दायित्व की ओर इंगित करती है। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय छत्तीसगढ़ ने यह रिपोर्ट सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में पेश की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि, यह तथ्य जीवन प्रत्याशा में वृद्धि तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का परिचायक है, लेकिन साथ ही यह संकेत भी देता है कि आगामी वर्षों में राज्य को वृद्धजन देखभाल, दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रबंधन तथा सामाजिक सुरक्षा आवश्यकताओं के क्षेत्र में एक सुदृढ़ योजना एवं संसाधन आवंटन की जरूरत होगी।
वृद्धजन समाज की अनुभवी एवं मूल्यवान मानव पूंजी होते हैं, लेकिन इस अवस्था में उन्हें स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता, संरक्षण तथा सम्मानजनक जीवन यापन के लिए विशेष सहयोग अपेक्षित होता है। छत्तीसगढ़ में 60 साल या उससे अधिक आयु वर्ग का निर्भरता अनुपात वर्ष 2021 में 138 से बढ़कर 2026 में 157 हो गया है। यह भी इस बात का संकेत देता है कि राज्य में वृद्ध जनसंख्या लगातार बढ़ रही है।
एक नजर किशोर और युवाओं पर
एक तरफ जहां राज्य में 60 साल से अधिक आयु वालों की संख्या राज्य में बूढ़ों की संख्या बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर ये देखना भी जरुरी है कि राज्य में किशोर आयु वालों और युवाओं की संख्या कहां तक जा पंहुची है। जनसांख्यिकी के आंकड़ों के मुताबिक 2026 में अनुमानित रूप से किशोरों की संख्या 17.49 प्रतिशत तथा युवाओं की संख्या 26.24 प्रतिशत है।
दूरदर्शी नीति बनाने की जरूरत
इस रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की गई है कि सरकार को वृद्धजन कल्याण को केंद्र में रखते हुए जेरियाट्रिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, वृद्धजनों के अनुकूल आधारभूत संरचना का विकास तथा देखभाल एवं पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने के लिए समेकित एवं दूरदर्शी नीति अपनाना आवश्यक होगा।








