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राज्य में महिलाओं की बदलती जीवनशैली का नया अध्याय शुरू हो गया है, अब महिलाएं घर में नहीं बाहर का काम भी संभाल रहीं है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब महिलाएं केवल घरेलू कामकाज में हाथ बंटाने वाली ही नहीं रह गई हैं, यहां महिलाएं अपने घरों से निकलकर रोजी-रोजगार से जुड़े काम करके हाउस वाइफ की जगह वर्किंग वुमन का कल्चर अपना रही हैं। यही नहीं, बदलाव के इस दौर में राज्य के बड़े शहर-जिलों की महिलाओं के मुकाबले छोटे जिले और ग्रामीण परिवेश की महिलाओं में कामकाजी बनने का जज्बा अधिक नजर आ रहा है। राज्य में यह बदलाव महिलाओं के सामाजिक आर्थिक उन्नयन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

इसका व्यापक असर राज्य में महिलाओं की बदलती जीवनशैली का एक उजला अध्याय बनता जा रहा है। छत्तीसगढ़ के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2011 से 1 मार्च 2026 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो राज्य में कामकाजी महिलाओं की कुल संख्या 50 लाख 46 हजार 359 से बढ़कर 61 लाख 28 हजार 748 हो गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि बीते 15 वर्षों में राज्य की लगभग 10.82 लाख अतिरिक्त महिलाएं कार्यबल का हिस्सा बनी हैं। जहां शहरी जिलों में औद्योगिक विकास ने राह दिखाई, वहीं नए बने जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं के आत्मनिर्भर होने की प्रवृत्ति स्पष्ट नजर आ रही है।

working women

बड़े शहरों की महिलाओं की स्थिति
छत्तीसगढ़ में बड़े और पुराने जिलों में वर्किंग वुमन की स्थिति देखें तो पता लगता है कि राजधानी रायपुर में कामकाजी महिलाओं की संख्या में 26.46 प्रतिशत की सम्मानजनक वृद्धि दर्ज की गई है (2.64 लाख से 3.34 लाख)। इसके साथ ही राज्य के अन्य बड़े जिलों में बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर, राजनांदगांव, अंबिकापुर आदि आते हैं,लेकिन यहां वर्किंग वुमन की तादाद में उस तरह की वृद्धि नहीं नजर आ रही है, जैसी छोटे और ग्रामीण परिवेश वाले जिलों में दिखी है।

प्रतिशत के हिसाब से बलौदाबाजार और सक्ती में महिलाओं के काम करने के रुझान में सबसे बड़ा बदलाव आया है, लेकिन दूसरी ओर बस्तर संभाग की स्थिति कुछ और ही कहानी कह रही है। बस्तर संभाग के कुछ जिलों (बस्तर, कांकेर, सुकमा) में कामकाजी महिलाओं की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है, जो वहां रोजगार के सीमित अवसरों या अन्य भौगोलिक कारणों की ओर इशारा करती है।

बीते 15 साल का जिलेवार विश्लेषण (2011 से 1 मार्च 2026)
शीर्ष 5 जिले (जहां कामकाजी महिलाओं की संख्या में सर्वाधिक प्रतिशत वृद्धि हुई है। यह देखना दिलचस्प है कि बड़े शहरों के बजाय विकासशील जिलों में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा बढ़ी है। प्रतिशत की गणना 2011 के आधार वर्ष और 1 मार्च 2026 के अनुमानित आंकड़ों के बीच के अंतर से की गई है।

कामकाजी महिलाओं में वृद्धि

  • बलौदाबाजारः 2.12 लाख से 3.11 लाख- 46.13%
  • जांजगीर-चांपा: 2.12 लाख से 2.96 लाख- 39.61%
  • सक्तीः 1.56 लाख से 2.27 लाख- 45.66%
  • मुंगेलीः 1.52 लाख से 2.09 लाख- 36.83%
  • बेमेतराः 1.82 लाख से 2.59 लाख- 42.17%

5 जिले, जहां कामकाजी महिलाओं की संख्या में सबसे कम वृद्धि
कुछ जिलों में यह वृद्धि स्थिर रही है या बहुत ही धीमी गति से बढ़ी है। उत्तर बस्तर कांकेरः -0.05% (यहां संख्या में मामूली गिरावट देखी गई, 1,71,846 से 1,71,744)। बस्तरः 0.08% की नाममात्र वृद्धि (1,63,988 से 1,64,130)। रायगढ़ः 2.53% की वृद्धि (1.84 लाख से 1.89 लाख)। सुकमाः 2.94% की वृद्धि (68,675 से 70,696)। नारायणपुरः 5.21% की वृद्धि (32,903 से 34,620)।  

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