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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने छत्तीसगढ़ के सड़क निर्माण कामों पर ब्रेक लगाने के आसार खड़े कर दिए हैं। 

सचिन अग्रहरि- राजनांदगांव। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने छत्तीसगढ़ के सड़क निर्माण कामों पर ब्रेक लगाने के आसार खड़े कर दिए हैं। पिछले एक माह के भीतर डामर, इमल्शन और लाईट डीजल आयल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी के चलते बुनियादी ढांचे के विकास पर महंगाई का बड़ा साया मंडराने लगा है।

प्रदेश के कई जिलों में करीब दस हजार करोड़ रुपए के पीडब्ल्यूडी, पीएमजीएसवाय सहित एनएचएआई की कई परियोजनाओं पर काम बंद होने की भी नौबत आ गई है।  राज्य के कई ठेकेदारों ने शासन को पत्र लिखकर निर्माण काम के लिए हाथ भी खड़े कर दिए हैं। मध्य पूर्व क्षेत्र में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों और पेट्रोलियम आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा हो गया है। जिसके कारण छत्तीसगढ़ सहित देशभर में तेल टैंकरों और एलएनजी वाहकों की कमी हो गई है और इस बीच दामों में बेतहाशा वृद्धि के कारण इसका सीधा असर विकास कामों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। 

निर्माण काम में लगने वाली मशीनों को भी डीजल नहीं मिल रहा है
सूत्रों के अनुसार,  डामर की कीमतें जो पहले लगभग 40,000 रुपए प्रति टन के आसपास थी, अब बढ़कर 55,000 से 65,000 रुपए प्रति टन तक पहुंच गई है। वही हाल इमल्शन के रेट का हुआ है। यहां भी काफी बढ़ोत्तर हो गई है। इसके साथ ही मशीनों को चलाने में इस्तेमाल होने वाले एलडीओ के दाम 51 रुपए लीटर तक बढ़ गए हैं। इधर सीमेंट के दामों में हुए इजाफे के कारण निर्माण काम बंद होने के कगार पर आ गए हैं। निर्माण काम में लगने वाली मशीनों को भी डीजल नहीं मिल रहा है। इधर ठेकेदारों का कहना है कि युद्ध के पहले की स्थिति में निर्माण कामों के जो रेट निर्धारित थे, उन्होंने उसी दर के आधार पर टेंडर भरा था, लेकिन अब दामों में अप्रत्याशित वृद्धि होने से वे नुकसान में आ गए हैं।

ठेकेदारों की सरकार से मांग
छत्तीसगढ़ ठेकेदार संघ ने सरकार से मांग की है कि वर्तमान बाजार दर के हिसाब से प्रोजेक्ट की लागत का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। यदि कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली या सरकार ने दरों में संशोधन नहीं किया, तो प्रदेशभर में सड़कों का डामरीकरण पूरी तरह ठप हो सकता है। जिससे मानसून से पहले अधूरे पड़े काम आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।

30 से 40 फीसदी तक वृद्धि
डामर सहित सड़क निर्माण कामों में उपयोग में आने वाले सामानों के रेट में तीस से चालीस फीसदी तक वृद्धि होने से राज्य में सड़क निर्माण काम बंद होने के कगार पर आ गए हैं। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, बस्तर और सरगुजा संभाग में ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है। ठेकेदारों का कहना है कि पुरानी दरों पर काम करना अब उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

सरकार दे राहत
बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया प्रदेश अध्यक्ष  बताया कि, युद्ध के कारण देशभर में निर्मित अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार से आर्थिक राहत मांगी गई है। सामानों के दामों में वास्तविक वृद्धि के आधार पर प्रोजेक्ट का पुनर्मूल्यांकन कर ठेकेदारों को राहत दी जाए। इस संबंध में एसोसिएशन शासन को एक पत्र भी सौंपा है।

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