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महिला आयोग सदस्य अधिवक्ता दीपिका ने सुकमा जिले के सभी धर्मों से बोर्ड परीक्षाओं के दौरान लाउडस्पीकर सीमित रखने की अपील करते हुए छात्रों को शांत वातावरण देने की बात कही।

लीलाधर राठी - सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बोर्ड एवं वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी ने सभी धर्मों और समुदायों से संवेदनशील अपील की है कि वे बच्चों की पढ़ाई और एकाग्रता को ध्यान में रखते हुए लाउडस्पीकर का उपयोग सीमित रखें या निर्धारित समय में ही करें।

कुल 3484 विद्यार्थी दे रहे परीक्षा, शांत वातावरण जरूरी
अधिवक्ता दीपिका ने बताया कि-

  • कक्षा 10वीं के 2047 विद्यार्थी
  • कक्षा 12वीं के 1437 विद्यार्थी

कुल 3484 छात्र-छात्राएं जिले में बोर्ड परीक्षाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि, यह सभी विद्यार्थी जीवन के महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहे हैं, इसलिए उन्हें सकारात्मक और शांत वातावरण मिलना बेहद आवश्यक है।

सभी धर्मों और समुदायों से अपील
दीपिका ने स्पष्ट किया कि उनकी अपील किसी एक धर्म, संप्रदाय या संस्था को लक्षित नहीं करती। यह अपील समान रूप से-

  • मंदिर
  • मस्जिद
  • गुरुद्वारा
  • चर्च

एवं अन्य धार्मिक संस्थानों से की गई है। उन्होंने कहा कि, उद्देश्य केवल बच्चों के हित में शांतिपूर्ण माहौल बनाना है, ताकि वे परीक्षा के दिनों में बिना व्यवधान तैयारी कर सकें।

बच्चों का भविष्य ज्यादा महत्वपूर्ण
दीपिका ने कहा 'धार्मिक आस्था और परंपराएं समाज की आत्मा हैं, लेकिन भविष्य की पीढ़ी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। परीक्षा अवधि में थोड़ा सहयोग बच्चों के भविष्य में बड़ी भूमिका निभा सकता है।' उन्होंने जिलेवासियों से आग्रह किया कि परीक्षा के दौरान निर्धारित समय और ध्वनि सीमा का पालन करें।

सामाजिक सौहार्द और जिम्मेदारी का संदेश
अधिवक्ता दीपिका ने कहा कि समाज की शक्ति परस्पर सम्मान और सामूहिक सहयोग में निहित है। उन्होंने कहा कि, परीक्षा अवधि अस्थायी होती है लेकिन बच्चों का भविष्य दीर्घकालिक है, इसी सोच से उन्होंने सभी धर्म गुरुओं, प्रबंध समितियों और सामाजिक संगठनों से इस अपील का समर्थन करने का अनुरोध किया।

पूरे जिले से सकारात्मक सहयोग की उम्मीद
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुकमा सहित पूरा जिला इस अपील को आपसी सौहार्द और संवेदनशीलता के साथ स्वीकार करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल किसी प्रतिबंध का रूप नहीं है, बल्कि समाज, धर्म और शिक्षा के संतुलन से विद्यार्थियों के लिए अनुकूल वातावरण निर्माण का आह्वान है।

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