मैनपुर। गरियाबंद जिले के पहाड़ी पर बसे ग्रामों में आज आजादी 79 वर्षों बाद सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए 15 से 20 किमी की दूरी पैदल तय करने के बाद मरीज को उल्टे खाट पर बिठाकर या फिर लकड़ी का कांवर बनाकर अस्पताल तक इलाज के लिए लाना पड़ता है। समय पर अस्पताल तक मरीज पहुंच गया तो ठीक, नहीं तो दम तोड़ देते हैं। यह स्थिति वर्षों से बनी हुई है। लेकिन इस समस्या का समाधान आज तक नहीं हो पाया है।
कुल्हाड़ीघाट का है मामला
बुधवार को फिर एक मरीज को पहाड़ी ऊपर के गांव से कांवर के जरिये 17 किमी पैदल कुल्हाड़ीघाट तक लाया गया। यहां पहुंचने पर जब मरीज के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हुई तो परिजनों ने प्राइवेट वाहन से मैनपुर अस्पताल पहुंचाया, जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। मरीज का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। जानकारी के अनुसार गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मुख्यालय मैनपुर से 18 किलोमीटर दूर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का गोद ग्राम कुल्हाड़ीघाट है।
लगभग चार घंटे तक लगातार पैदल चलते रहे
पहाड़ी पर बसे ग्राम भालूडिग्गी में एक कमार जनजाति के ग्रामीण मन्नू नेताम की तबीयत अत्यधिक खराब होने के कारण बुधवार को उनके परिजन एवं गांव के ग्रामीणों ने उन्हें इलाज के लिए लाने के लिए लकड़ी एवं बास से कावर चैली निर्माण किया और उसमें लिटा कर मरीज को पहाड़ी दुर्गम रास्तों को पार करते हुए 17 किलोमीटर पैदल चल कुल्हाड़ीघाट तक लाया। ग्रामीणों ने बताया लगभग 4 घंटे लगातार पैदल चलने के बाद कुल्हाड़ीघाट तक पहुंचे, यहां के ग्रामीणों ने बताया जब भी पहाड़ी ऊपर बसे ग्रामों में किसी का भी तबीयत खराब होती है तो उन्हें इसी तरह अस्पताल तक पहुंचाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक लाने में होती है।
कई बार सड़क निर्माण की मांग कर चुके हैं लेकिन अब तक माँगा पूरी नहीं हुई
ग्रामीणों ने बताया, कई बार सड़क निर्माण की मांग कर चुके हैं लेकिन अब तक सड़क का निर्माण नहीं किया गया है। इन गांवों में पक्की सड़कों का अभाव है बड़ी गाड़ियां वहां आसानी से पहुंच नहीं पाती हैं। इससे मरीजों को अक्सर चिकित्सा सहायता के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। समय पर एंबुलेंस न पहुंचने से मरीजों की हालत बिगड़ जाती है कभी-कभार तो मरीज की जान भी चली जाती है। चाहे ग्राम डूमरघाट की बात हो या फिर राजापड़ाव गौरगांव क्षेत्र के अंतिम इलाके या सायबिनकछार क्षेत्र के गांवों में आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है, जिसके कारण इन ग्रामों में एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती।
धरातल पर नहीं हुआ काम
जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने कहा इस आदिवासी क्षेत्र की ग्रामीण लगातार सड़क बिजली स्वास्थ्य शिक्षा पेयजल बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक तरफ सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है दूसरे तरफ धरातल में कुछ भी नहीं है।
कई बार विधानसभा में उठाया मुद्दा
बिंद्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक जनक ध्रुव ने बताया मेरे विधानसभा क्षेत्र के दर्जनों ग्रामों में पहुंचने के लिए आज तक पक्की सड़क नहीं है। कई बार इस मामले को विधानसभा में उठाया गया है। वहीं जिले के आला अफसरों को भी अवगत कराया जा चुका है। लेकिन भाजपा सरकार में भेदभाव किया जा रहा है