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रायपुर। छत्तीगसढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान प्रदेश में स्कूल जीर्णोद्धार और अन्य कमरों के निर्माण के लिए स्कूल जनत योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के लिए उस समय की भूपेश बघेल सरकार ने करीब 2 हजार करोड़ रुपये जारी किये थे। लेकिन अब सरकार को ऐसी शिकायतें मिली हैं कि, इस योजना के तहत ज्यादातर काम हुए ही नहीं हैं और जो हुए हैं उनकी गुणवत्ता बेहद खराब है। इस तरह की शिकायतों के बाद सीएम विष्णु देव साय ने जांच के आदेश दिए हैं।
स्कूल शिक्षा सचिव ने कलेक्टरों को लिखा पत्र
सीएम साय से मिले निर्देश के आधार पर स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परेदशी ने राज्य के सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर रिपोर्ट तलब की है। कलेक्टरों को जारी पत्र में स्कूल शिक्षा सचिव ने कहा कि, योजना के तहत स्वीकृत किए गए कार्यों का औचित्य, उसकी वास्तविक आवश्यकता, पूर्ण/प्रगतिरत कार्यों की गुणवत्ता एवं वास्तविक लागत की जांच की जाए। आपके द्वारा निर्धारित निर्माण एजेंसी के द्वारा ही कार्य किया जा रहा है। कार्यों की गुणवत्ता की जांच अपने स्तर पर विशेषज्ञ समिति बनाकर बिन्दुवार करावें। जांच में गड़बड़ी पाये जाने पर संबंधित के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही / विधिसम्मत कार्यवाही आपके द्वारा किया जाना सुनिश्चित करें। सभी कार्यों की जांच कराने के पश्चात कार्यवाही कर संलग्न प्रारूप में पालन प्रतिवेदन 15 दिन के भीतर संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय उपलब्ध कराया जाये।
जांच के बाद कई अफसरों पर गिरेगी गाज
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इस योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और धांधली की है। योजना के ज्यादातर काम कागजों में कराये गए हैं। जिसका भुगतान कर दिया गया है। बताया जाता है कि, इस गड़बड़ी में विभाग के कई बड़े अफसरों की भी मिलीभगत शामिल हैं। ऐसे में पूरी योजना की जांच के निर्देश से विभाग में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने पर कई बड़े अफसरों पर भी गाज गिरे सकती है।
