Logo
आईपीएल के दौरान ऑनलाइन सट्टा वेबसाइट्स पर बढ़ती अवैध गतिविधियों का खुलासा। सख्ती के बावजूद नए डोमेन, बोनस ऑफर और एजेंट नेटवर्क के जरिए युवाओं को बनाया जा रहा निशाना।

रायपुर। भारत में ऑनलाइन सट्टा ऐप्स और वेबसाइट्स पर रोक लगाने के बाद भी इंटरनेट पर इनका कारोबार अब भी बेलगाम है। सुप्रीम कोर्ट रोक और सरकार द्वारा 7000 से अधिक वेबसाइट्स को ब्लॉक किए जाने के बावजूद, आईपीएल शुरू होते ही इंटरनेट पर ऑनलाइन सट्टा खेलने के लिए कई नई वेबसाइट्स बन चुकी हैं। 

इनमें बड़ी आसानी से लॉगिन करने के बाद मैच की हर बॉल पर दांव लगाया जा रहा है। कुछ वेबसाइट्स ऐसी भी हैं जिन्हें पहले ब्लॉक कर दिया गया था, लेकिन अब वे पुराने नामों से मिलते-जुलते नए नामों के साथ फिर से संचालित होने लगी हैं। आईडी खरीदने से लेकर मोबाइल नंबर के जरिए इन सट्टा वेबसाइट्स पर रजिस्टर किया जा रहा है। 

20 से अधिक ऐसी वेबसाइट्स गूगल के पहले पेज में मिलीं
वहीं खुले बाजार में भी सट्टा लगाया जा रहा है। हरिभूमि ने जब इंटरनेट पर इन ऑनलाइन सट्टा वेबसाइट्स की पड़ताल की, तो 20 से अधिक ऐसी वेबसाइट्स गूगल के पहले पेज में मिलीं जिनमें केवल आईपीएल ही नहीं, बल्कि देशभर में हो रहे सभी तरह के खेलों पर सट्टा लगाया जा रहा है। इसके साथ ही, पैसों वाले वो गेम भी इनमें मौजूद हैं जो पहले ऐप्स पर होते थे। सरकार द्वारा उन ऐप्स को बंद किए जाने के बाद अब वे गेम्स वेबसाइट्स पर खेले जा रहे हैं। 

वेबसाइट्स आईडी बनाने पर यूजर्स को दिए जाता है बोनस
पड़ताल के दौरान जब हरिभूमि ने इन वेबसाइट्स पर आईडी बनाई, तो चंद सेकंड में ही लॉगिन हो गया। इसमें न तो उम्र पूछी गई और न ही शहर की जानकारी मांगी गई। केवल मोबाइल नंबर या ईमेल के जरिए आईडी बनते ही सीधे मैच पर सट्टा लगाने का विकल्प सामने आ गया। खास बात यह भी है कि, आईपीएल को लेकर कई वेबसाइट्स आईडी बनाने पर यूजर्स को बोनस भी दे रही हैं।

50 रुपए में सीधे 100 का मुनाफा 
हरिभूमि ने 4rabet120.com, baterybets, iwebhr और luckkudo life जैसी ऑनलाइन सट्टा वेबसाइट्स की भी पड़ताल की, जो इंटरनेट पर बिल्कुल नई हैं। ये वेबसाइट्स मैच शुरू होने से पहले ही लोगों को हर बॉल, ओवर और चौके-छक्के पर सट्टा लगाने का विकल्प दे रही हैं। अन्य वेबसाइट्स की तरह इनमें भी बोनस दिया जा रहा है, जिससे दांव लगाने में छूट मिल रही है। खास बात यह है कि इनमें 50 रुपए लगाने पर 100 रुपए मिलने, यानी सीधे पैसे डबल होने का लालच दिया जा रहा है। साथ ही, मिलने वाला मुनाफा भी पहले ही बता दिया जाता है। हर जीत पर सौ रुपए लगाने पर 2000 रुपए तक का 5 मुनाफा होने का लालच भी दिया जा रहा है। 

डोमेन बदलकर और विदेशी सर्वर का इस्तेमाल: सरकार द्वारा 2025 में लाए गए ऑनलाइन गेमिंग कानून के तहत रियल मनी बेटिंग को प्रतिबंधित किया गया है। 

अन्ना रेड्डी अभी भी एक्टिव
क्यूआर कोड देकर मांग रहे पैसे, फिर दे रहे आईडी: सट्टा खेलने के लिए अन्ना रेड्डी नाम की वेबसाइट लोगों के बीच काफी चर्चित है। इसमें लॉगिन करने के लिए आईडी की आवश्यकता होती है। इसके लिए वेबसाइट पर एक नंबर भी दिया गया है, जिस पर व्हाट्सएप करके 'वांट मी आईडी लिखना होता है। हरिभूमि जब इस प्रोसेस में आगे बढ़ी, तो 15 मिनट के बाद उस नंबर से जवाब में एक मैसेज आया कि कम से कम 300 रुपये देने होंगे, जिसके बाद ही आईडी बनाकर दी जाएगी। पैसे भेजने के लिए व्हाट्‌सएप पर बाकायदा एक क्यूआर कोड भी भेजा गया था।

ये है सट्टे की भाषा

  • बुकी- डिब्बा
  • एजेंट- पंटर
  • क्लाइंट- लाइन
  • एक लाख- एक पैसा
  • सवा लाख- सवा पैसा

बिलासपुर में चकरभाठा सट्टे का बड़ा बाजार
बिलासपुर में चकरभाठा सट्टे का सबसे बड़ा बाजार है तो सरकंडा क्षेत्र धीरे-धीरे इसका गढ़ बनता जा रहा है। जरहाभाठा और मगरपारा में पुराने खाइवाल रहें हैं। पुलिस की कार्रवाई के बाद लेकिन खेल अंडरग्राउंड होकर चल रहा है। घुरू अमेरी, दयालबंद, हेमूनगर, यदूनंदन नगर और तिफरा रोजाना लाखों करोड़ों का सट्टा लगता है। हरिभूमि ने घुरू अमेरी क्षेत्र के एक प्रमुख सट्टेबाज से बात की तो उसने स्वीकार किया की करोड़ों का सट्टा लग रहा है। सट्टे के खेल में पुराने खिलाड़ियों के साथ ही युवाओं और छात्रों को ज्यादा शामिल किया जा रहा है। इसने बताया कि अब ऑनलाइन साइट पर कई ऐसे ऐप आ गए है जिसके जरिए बुकी के ऐजेंट सट्टा लगाने वालों से रकम लेकर उनकी नई आईडी बनाते हैं और फिर उस आईडी में रकम डालते हैं।

शहर के प्रमुख खाइवाल ने बताया

हरिभूमि - आईपीएल में सट्टा कैसे लगाया जाता है, क्या करना होगा

खाइवाल- आईपीएल का सट्टा लाइन पर चलता है। लाइन का नंबर छोटे शहरों में बैठे बुकी के पास होता है। बुकी ही लोगों को सट्टा खिलवाते हैं। मैच शुरू होने के साथ भाव तय होता है। मजबूत और कमजोर टीम के हिसाब से लाइन पर भाव आते हैं। इस भाव के आधार पर ही युवा बुकी के जरिए सट्टे पर रुपए लगाते हैं। इसके अलावा प्रति ओवर, प्रति बाल के हिसाब से भी लोग सट्टा लगाते हैं। सट्टा लगाने वाले व्यक्ति को लाइन कहा जाता है, जो एजेंट यानी पंटर के माध्यम से बुकी (डिब्बे) तक संपर्क करता है। एजेंट को एडवांस देकर अकाउंट खुलवाना पड़ता है, जिसकी एक लिमिट होती है। खाइवाल ने आगे जरहाभाठा और मगरपारा में पुराने खाइवाल रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई के बाद लेकिन खेल अंडरकाउंड होकर चल रहा है। घुरू अमेरी, दयालबंद, हेमूनगर, यदूनंदन नगर और तिफरा में रोजाना लाखों करोड़ों का सट्टा लगता है। 

युवाओं और छात्रों को किया जा रहा ज्यादा शामिल
हरिभूमि ने घुरू अमेरी क्षेत्र के एक प्रमुख सट्टेबाज से बात की तो उसने स्वीकार किया की करोड़ों का सट्टा लग रहा है। सट्टे के खेल में पुराने खिलाड़ियों के साथ ही युवाओं और छात्रों को ज्यादा शामिल किया जा रहा है। इसने बताया कि अब ऑनलाइन साइट पर कई ऐसे ऐप आ गए है जिसके जरिए बुकी के ऐजेंट सट्टा लगाने वालों से रकम लेकर उनकी नई आईडी बनाते हैं और फिर उस आईडी में रकम डालते हैं।

हरिभूमि - सट्टे का भाव कैसे तय होता है, कौन तय करता है?

खाइवाल - सट्टे के भाव को डिब्बे की आवाज बोला जाता है। आईपीएल क्रिकेट में सट्टेबाज 20 ओवर को लंबी पारी, दस ओवर को सेशन और छह ओवर तक सट्टा लगाने को छोटी पारी खेलना कहते हैं। इन पांच ओवरों में खेलने वाली टीम कितने रन बनाएगी और इसके कितने खिलाड़ी आउट होंगे व कौन सा खिलाड़ी कितने रन बनाएगा, सभी पर सट्टा लगा होता है।

हरिभूमि- मैच से पहले ही सट्टे का भाव तय होता है क्या?

खाइवाल- मैच की पहली गेंद से लेकर टीम के जीत तक भाव चढ़ते उतरते हैं। एक लाख को एक पैसा, 50 हजार को अठन्नी, 25 हजार को चवन्नी कहा जाता है। यदि किसी ने दांव लगा दिया और वह कम करना चाहता है तो फोन कर एजेंट को 'मैंने चवन्नी खा ली' कहना होता है। टॉस पर भी मोटा सट्टा लगता है।

हरिभूमि- पुलिस पकड़ती नहीं क्या, बचने के लिए क्या करते हो?

खाइवाल - सावधानी बरती जाती है कि एक बार कोई मोबाइल नंबर यूज हो गया तो उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता। पुलिस की नजर से बचने के लिए दर्जनों मोबाइल फोन रखते हैं। फोन टैप होने के डर से हरेक खिलाड़ी का रेट, जीत हार, कुल स्कोर आदि पर लगने वाले सट्टे के रेट एसएमएस से एक दूसरे को भेजे जाते हैं। इसमें नगद लेनदेन नहीं होता। फोन पर ही काल कर सट्टा लगाया जाता है। मोबाइल वालेट और खाता के जरिए पैसे इधर-उधर किए जाते हैं। बुकी मोबाइल लेकर घर पर बैठा है या कहीं और यह जानकारी पुलिस को नहीं मिल पाती। 

पूरा नेटवर्क लेपटॉप, मोबाइल पर
चकरभाठा के एक दूसरे खाइवाल ने बताया कि, यह पूरा नेटवर्क आधुनिक संचार प्रणाली लेपटॉप, मोबाइल, वाइस रिकार्डर आदि पर ही चल रहा है। सटोरियों ने कोड वर्ड ले रखे हैं, जिसमें चांदी व सोने का क्या भाव चल रहा है आदि शामिल हैं। पुलिस से बचने के लिए सटोरिए हर रोज ठिकाना भी बदल लेते हैं। यही नहीं उन्होंने आगे कारिंदे भी रखे हुए हैं ताकि अगर पुलिस कार्रवाई हो तो वे साफ बचकर निकल जाएं। स्टोरियों के तार दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों से जुड़े हुए हैं। जहां से पल-पल की जानकारी मिलती रहती है।

7