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नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में 35 वर्षों तक चले नक्सल प्रभाव के बाद अब शांति और विकास की राह खुल रही है। 149 जवानों की शहादत।

राजेश दास- नारायणपुर। बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले का माड़ इलाका नक्सलियों का सबसे मजबूत किला माना जाता था। दुर्दात नक्सली यहां पनाह पाते थे। नक्सलियों के सबसे मजबूत किले माने जाने वाले नारायणपुर जिले को नक्सलमुक्त करना इतना आसान था। क नहीं नक्सलियों साम्राज्य को समाप्त करने में 35 वर्ष लग गए। कभी छत्तीसगढ़ की रक्तिम पहचान बना माओवादी व उनकी विचारधारा अब आखिरी सांस रही है। 

यह वक्त उन शहीदों को नमन करने का है जिन्होंने अपना जीवन न्योछावर कर दिया ताकि हम यह दिन देख सकें। राजनांदगांव के बाद दूसरी कहानी बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले की जो कुछ समय पहले तक नक्सलियों का सबसे महफूज व मजबूत इलाका माना जाता था। यहां नक्सल संगठन के माड़ डिवीजन की तूती बोलती थी। बाहरी लोगों को तो यहां आने की मनाही थी। यहां तक कि स्थानीय बाशिदों को भी पूरी पड़ताल के बाद ही गांव में जाने के लिए एंट्री मिलती थी।

माड़ का यह पूरा इलाका नक्सल मुक्त होने की कगार पर
नक्सलियों ने बकायदा यहां चेकपोस्ट बनाया था जहां स्थानीय के अलावा चाहरी और सरकारी कर्मचारियों की पूरी इन्कवारी की जाती थी जिसके बाद ही उन्हें अनुमति मिलती थी। आज माड़ का यह पूरा इलाका नक्सल मुक्त होने की कगार पर है। लेकिन इसे नक्सलियों से मुक्त करने में शहीद हुए पुलिस अधिकारियों व जवानों की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने अयूइस्माड़ की शांति के लिए अपना चलिदान दिया।

149 जवान-अधिकारी हुए शहीद 
नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास की स्थापना के लिए अब तक कुल 149 वीर जवानों ने अपना स्वर्वोच्च बलिदान दिया है। इनमें सर्वांधिक 95 अधिकारी व जवान स्थानीय पुलिस बल के अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ के 46 व आईटीवीपी के 8 अधिकारी व कर्मी शामिल हैं। इन सभी वीरों का त्याग और समर्पण इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने तथा आम जनजीवन को सुरक्षित बनाने के प्रयासों का आधार रहा है। उनके बलिदान ने अयुझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में विकास और विश्वास की राह प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निमाई है।

माओवादियों का एक सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है यह इलाका
आआंदोलन के प्रवेश के बाद से ही अबूझमाड़ का दण्डकारण्य अबूझमाड़ का दण्डकारण्य सुरक्षित ठिकाना बस्तर क्षेत्र में नक्सली माओवादियों का एक सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। घने जंगल पहाड़ी और दुर्गग भू-माग सीमित संपर्क व्यवस्था तथा विरल आचादी जैसे भौगोलिक कारणों के चलते यह क्षेत्र लबे समय तक नक्सली गतिविधियों के लिए अनुकूल भाना जाता था। इन्हीं परिस्थितियों के कारण सुरक्षा बलों को यहां शांति स्थापित करने के लिए वर्षों तक कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से कार्य करना पड़ा। क्षेत्र

पहली शहादत 1993 में 
नारायणपुर क्षेत्र में शहादत की पहली घटना 33 वर्ष पहले 28 नवमार 1993 को हुई थी जब उस समय अविभाजित धस्तर जिले के अंतर्गत आने वाले छोटेडोंगर थाना के आरक्षक देव सिंह कोरांम की सुई। वे नक्सली घटना में टेकनार गांव के पास शहीद हो गए थे। वहीं इस जिले में शहादत की हालिया घटना 21 मई 2025 को कोडमेल जंगल में हुई जच बसवराजू मुठभेड़ के दौरान सैनिक गोटलू राम कोरांम ने वीरगति प्राप्त की। इन दोनों घटनाओं के बीच के वर्षों में अनेक वीर जवानों ने अपने प्राणों की आयुति देकर अबूझमाड़ क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की स्थापना के लिए अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया।

दूसरी बड़ी 
घटना जिले में दूसरी बड़ी घटना घटना 29 जून 2010 के दोपहर एक बजे से शाम साढ़े चार बजे के मध्य हुई। जिले के थाना धौड़ाई क्षेत्र के ग्राम कौसलनार-महराबेडा के मध्य मुख्य मार्ग पर हुई। थाना थौडाई से जिला बल व केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त पुलिस पार्टी

सशस्त्र नक्सलियों ने किया था पुलिस पर फायरिंग
अवकाश पर जाने एवं अवकाश से आने वाले जवानों को लेने झाराधाटी की ओर रवाना हुई थी। जवानों को छोडकर एवं अवकाश से आने वाले जवानों को लेकर पुलिस पार्टी मुख्य मार्ग के दोनों ओर सर्चिग करते हुये पास आ रही थी। तभी ग्राम महराबेडा एवं कौसलनार के मध्य जंगल एवं नदी में पूर्व से घात लगाये सशस्त्र नक्सलियों द्वारा पुलिस पर फायरिंग किया गया। पुलिसपार्टी द्वारा तत्काल पोजिशन लेकर जवाबी कार्यवाही किया गया। इस मुठभेड़ में 27 केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान शहीद हुए जबकि 5 जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे।

तीसरी बड़ी घटना
10 जनवरी 2017 को 8:30 बजे ग्राम ईरपानारं व कावानार के बीच नदी जंगल किनारे थाना छोटेडोंगर में हुई। गश्त के लिए शासकीय वाहन बारसूर के कैम्प सातधार पंहुचे वहा से रूट चार्ट के मुताबिक पैदल ग्राम गुफा तोडना तुलार एवं मंगल नदी पहाड़ों का सर्व करते 9 जनवरी को रात्रि होने से इरपानार के पास वाली पहाड़ी में रात्रि विश्राम किये। इसके बाद 10 जनवरी को ग्राम ईरपानार का सर्च करते ग्राम कावानार की ओर बढ़ रहे थे। 

सशस्त्र माओवादियों द्वारा घात लगाकर पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध फायरिंग कर दिये। मुठभेड के दौरान प्रधान आरक्षक भुनेश्वर मण्डावी शहीद हो गये। मठमेड़ में नक्सली डीवीसी तिरूपति निवासी महाराष्ट्र के अलावा श्याम यादव निवासी छिनारी कम्पनी नम्बर 6 का सदस्य, रत्ना मरकाम निवासी दक्षिण बस्तर कम्पनी नम्बर 6 का सदस्य तथा मंगल सलाम निवासी ईरपाना मिलिशिया सदस्य को जवानों ने मार गिराया। 

चौथी घटना
जिले में चौथी घटना 24 जनवरी 2018 को 10 बजे ओरछा थाना क्षेत्र के ग्राम ईरपानार के पूर्व दिशा में स्थित जंगल पहाड़ में हुई। 23 जनवरी को डीआरजी, एसटीएफ की संयुक्त पार्टी नक्सल अभियान पर रवाना हुए थे। ग्राम ईरपानार का सर्च करते आगे बढ़ रहे थे कि 200-250 सशस्त्र नक्सलियों द्वारा घात लगाकर पुलिस पार्टी पर फायरिंग किया गया। पुलिस पार्टी द्वारा भी आत्मसुरक्षार्थ जवाबी फायर किया गया। 

इस मुठभेड़ में उप निरीक्षक मुलचंद कवंर व विनोद कौशिक के आरक्षक देवनाथ पुजारी व रायसिंह मरकाम शहीद हो गये। जबकि आरक्षक रोहत बेसरा, धनकुमार लकड़ा, संतोष कुमार दुग्गा, नव आरक्षक घसिया राम कुमेटी, आरक्षक विजय नेताम, सहायक आरक्षक संजय पटेल, आरक्षक जगेन्द्र उईके, श्रवण भोयर, गोवर्धन कुंजाम, एपीसी जयकरण प्रजापति एवं आरक्षक बृजेश कुमार घायल हो गये।

पांचवी बड़ी घटना
जिले में पांचवी बड़ी घटना 23 मार्च 2021 के दोपहर लगभग 3.50 बजे ग्राम कन्हारगांव एवं कडेनार के मध्य ग्राम बुकिंनतोर, पुलिया थाना छोटेडोंगर में हुई। स्थानीय सूचना के आधार पर डीआरजी एवं आईटीबीपी की संयुक्त पार्टी नक्सल अभियान पर रवाना हई थी। - नक्सल गश्त सचिंग पश्चात आरओपी पार्टी लगने के बाद गश्त पार्टी के जवान कैम्प कड़ेमेटा से वापस नारायणपुर के लिये 4 बस एवं 1 छोटी वाहन बैठकर में से वापस मुख्यालय आ रहे रहे थे कि कैम्प कड़ेनार एवं कन्हारगांव के मध्य रोड ग्राम बुकिनतोर पुलियों में पूर्व बस्तर डिविजन में सक्रिय नक्सलियों द्वारा पुलिस जवानो को नुक्सान पहुंचाने एवं हथियार लूटने की नियत से मार्ग के मध्य आईईडी ब्लास्ट किया गया। 

ये जवान हुए घायल
इस ब्लास्ट में प्रधान आरक्षक पवन कुमार मंण्डावी, आरक्षक सेवक सलाम, चालक देवकरण देहारी, प्रधान आरक्षक जयलाल उईके, सहायक आरक्षक विजय पटेल शहीद हो गए। वहीं इस हमले में प्रधान आरक्षक नारायण नेताम, रमेश कुमार शोरी, आरक्षक सकेन्द्र नेताम, उमेश कुमार सोरी, मंगलु राम कुमेटी, सोमधर ध्रुव, रमेश कचलाम, नव आरक्षक सोमारू राम गोटा, हिरगु राम मेटामी, संतोष नेताम, सुखलाल पोयाम, सहायक आरक्षक विसम्बर पटेल, प्रेमचंद पात्र, हेमचंद पात्र, हेमेश्वर पात्र, संत कुमार दुग्गा तथा गाईड गोपनीय सैनिक झीराम पावे, लघुराम दोदी, धनसिंग सलाम, सोनू उरसाव, विजेन्द्र कश्यप, जगिया कश्यप व नागेश कश्यप घायल हो गये।

जवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर दी क्षेत्र को शांति
वीर जवानों के अदम्य साहस, त्याग और समर्पण का परिणाम अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास की जो राह आज दिखाई दे रही है वह हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस, साहस, त्याग और समर्पण का परिणाम है। अनेक जवानों ने अपने प्राणों की सर्वोच्च आहुति देकर इस क्षेत्र में विश्वास और स्थिरता की नींव रखी है। उनका बलिदान केवल सुरक्षा बलों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हम सभी का यह दायित्व है कि उनके त्याग को स्मरण रखते हुए अबूझमाड़ को स्थायी शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के संकल्प को और अधिक मजबूत करें। सुंदरराज पट्टलिंगम, आईजी बस्तर।

अबूझमाड़ में शांति और प्रगति की यात्रा निरंतर जारी रहेगी- एसपी 
नारायणपुर के एसपी रॉबिन्सन गुरिया ने कहा कि, अबूझमाड़ की धरती वीर जवानों की अमर शहादत की साक्षी रही है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अनेक चुनौतियों के बावजूद सुरक्षा बलों ने हमेशा दृढ़ता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ क्षेत्र में शांति स्थापित करने का प्रयास किया है। इन वीरों का त्याग हमें यह प्रेरणा देता है कि हम समाज के हर वर्ग के साथ मिलकर विश्वास, संवाद और विकास के मार्ग को आगे बढ़ाएं। उनकी शहादत केवल स्मृति नहीं बल्कि एक संकल्प है कि, अबूझमाड़ में शांति और प्रगति की यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी। 

26 वर्ष पहले एएसपी समेत 23 जवान हुए थे शहीद
जिले में एक बड़ी घटना नारायणपुर थाना क्षेत्र में 20 फरवरी 2000 के सुबह 10:10 बजे हुई थी। ग्राम बाकुलवाही नाला के पास चढ़ाव कोचवाही रोड में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में एडिशनल एसपी समेत 23 जवान शहीद हो गए थे। ग्राम जम्हरी में नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना पर एएसपी भास्कर दिवान अपने फोर्स को आवश्यक ब्रिफिंग कर 407 वाहन में सवार होकर सूचना की तस्दीक के लिए रवाना हुये थे। ग्राम कोचवाही नाला के पास पंहुचे थे कि 25-30 नक्सलियों द्वारा ग्राम कोचवाही नाला के पास बारूदी सुरंग विस्फोट किया गया जिससे 407 वाहन में सवार एएसपी भास्कर दिवान और 23 जवान शहीद हो गये।

केन्द्रीय अर्धसैनिक के शहीदों में ये शामिल
नारायणपुर जिले में तैनात सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, मिजो व नागा बटालियन के शहीद जवानों में सीआरपीएफ 140 वीं बटालियन के प्रधान आरक्षक विजनपाल, आरक्षक धर्मेन्द्र सिह, जयप्रकाश, व्ही मैथ्यू, सहायक सेनानी सीआरपीएफ विकास चन्द्रा, प्रधान आरक्षक जगन्नाथ चेटिया, दिनेश पाण्डे, प्रशात कुमार विश्वाल, सब इंसपेक्टर रोशन मिंज, मुस्ताक अहमद, बीजू कुमार एस, जय कुमार एस, एसआई आरएस कांग, के तिम्मना, रमेश चन्द्रपात्र, नरपत सिंह बोगा, पातंनु कुमार ढाल, वीरयल मंहता, जतिन गुलांटी, एमपी सिंह, विद्याधर बारीक, आरएन दास, सजि कुमार एस, रंजन कुमार साहू, जनरल सिंह, रंजू कुमार साहा, अंजन फूकंन, एस रामाराव, तारकेश्वर राय, धुबज्योति दास, तिलकराज, केएच आई सिंघा, पाणू राम नायक, तुषारबराल, नरेन्द्र मोहन झा, सोहेल राणा, आरसी हेमरम, एम कृष्णाराव, पंकज महंती, सुदामाचंद दास, अर्जुन गयारी, गोविंन्द प्रधान, समीर उरांव, पंकज बडीयाल, नीरज कुमार, एल बालरा स्वामी, रामटेके मंगेश, शिव नारायण मीणा, सिंधे सुधाकर, गुरमुख सिंह, राजेन्द्र सिंह, पवार अमर, के राजेश व संतोश शामिल हैं। 

शहीद सीएफ, डीएसएफ, बस्तर फाईटर, सहायक आरक्षक, गोपनीय सैनिक व नगर सैनिक
राज्य पुलिस बल में सबसे बड़े पुलिस अधिकारियों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भास्कर दीवान के अलावा आरक्षक देवसिंह कोर्राम, एसआई बीएस नेताम, एएसआई सुरेन्द्र ठाकुर, प्रधान आरक्षक बनसिंह मरकाम, मनाजरूलहक, पुरनसिंह यादव, लघुराम कोर्राम, दशरथराम नेताम, नेताम, जार्ज कुजूर, प्यारेलाल सोम, कन्हैया लाल कुंजाम, दिलीप कुमार कोसरे, हेमंत कुमार नागवंशी, मुन्ना सिंह, रतन सिंह, मिलउराम तेता, संतोष बघेल, मोतीराम बघेल, दिनेश दयाल, फखरुद्दीन, सोमारू उर्फ मुरा, लख्खू, रामचंद्र, दुक्का राम, खिलावन बिसेन, सुखदेव, रामसिंह उर्फ गागरा, योगेश मरकाम, जयसिंह ठाकुर, शिवलोचन साहू, विश्वेश्वर चक्रवर्ती, मुरलीधर सिन्हा, चंदर सिंह मरावी, शिवनारायण, धनीराम उसेण्डी, महेन्द्र सिंह, मंगतूराम पोताई, फिरतूराम बड़दा, पोलिकार्प तिग्गा, सुकमन राम, रामूराम कोर्राम, बिसुन दास कुरें, विजय कुमार यादव, रतिराम सिन्हा, पीलूराम नेताम, अशवनी प्रधान, अब्दुल वाहिद खान, बलीराम पोटाई, यामला धरमैय्या, क्लमेट लकड़ा, संतोष शर्मा, जुगबीर सिंह चुरेन्द्र, ऋषिकेश, संतोष पाहरे, ताराचंद निर्मलकर, चंदन सिंह पोर्ते, राजेन कुमार दीवान, सतीश सिंह यादव, बृजेश सिंह संजय सिंह राय, समारू वट्टी, आनंद राठौर, दानसाय सोरी, सोमबहादुर थापा, महेन्द्र सिंह, मनोज सिंह, पंकज सूर्यवंशी, अथनस बड़ा, अध्वनी राजपूत, पुष्पराज नागवंशी, पूरनसिंह पोताई, भुवनेश्वर मंडावी, संतोष मरकाम, विनोद सिंह कौशिक, मूलचंद कंवर, देवनाथ पुजारी, रायसिंह मरकाम, राजूराम नेताम, जितेन्द्र बघेल, संतू राम वड्डे, केसर सिंह उसेण्डी, जयलाल उइके, पवन कुमार मंडावी, सेवक राम सलाम, देवकरण देहारी, विजय पटेल, सालिकराम मरकाम, संजय लकड़ा, कमलेश कुमार साहू, नितेश एक्का, सत्तेर सिंह करंगा, बिरेंद्र कुमार शोरी, सन्नू कारम व खोटलूराम कोर्राम शामिल है।

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