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नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सलियों की अघोषित राजधानी माने जाने वाले, सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फरसगांव स्थित नक्सली स्मारक को ध्वस्त कर दिया।

इमरान खान- नारायणपुर। अबूझमाड़ कभी नक्सलियों का अभेद्य गढ़, जहां सुरक्षाबलों की पहुंच सपने जैसी मानी जाती थी। आज उसी अबूझमाड़ के भीतर नक्सलियों की मौजूदगी के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक उनका विशालकाय स्मारक में बुलडोजर चलाकर मिट्टी में मिला दिया गया है।

नारायणपुर जिले के थाना कोहकामेटा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम फरसगांव, कुतुल इलाके में नारायणपुर पुलिस और 41वीं वाहिनी आईटीबीपी की संयुक्त टीम ने नक्सलियों द्वारा बनाए गए विशाल स्मारक को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई नक्सल विरोधी अभियान ‘माड़ बचाओ’ के तहत 6 फरवरी को की गई।

नक्सलियों की अघोषित राजधानी
कुतुल इलाका लंबे समय तक नक्सलियों की अघोषित राजधानी के तौर पर जाना जाता रहा है। यहां संगठन की बैठकें, रणनीति और प्रचार गतिविधियां चलती थीं। फरसगांव में बना यह स्मारक नक्सलियों के लिए सिर्फ एक ढांचा नहीं था, बल्कि यह उनके प्रभाव, डर और वैचारिक पकड़ का प्रतीक माना जाता था। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह स्मारक स्थानीय लोगों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। अब इसका ध्वस्त होना नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है।

कैसे हुई कार्रवाई
नारायणपुर एसपी रॉबिंसन गुड़िया बताते हैं कि संयुक्त बल कुतुल, फरसगांव और आसपास के क्षेत्रों में एरिया डॉमिनेशन के लिए निकला था। तलाशी के दौरान गांव के भीतर बने विशाल स्मारक की पुष्टि हुई। खतरे को भांपते हुए पूरे इलाके को सुरक्षित किया गया और बाद में जेसीबी के जरिए स्मारक को पूरी तरह गिरा दिया गया। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की नक्सली मौजूदगी सामने नहीं आई, लेकिन इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।

अबूझमाड़: डर से विकास की ओर
अबूझमाड़ में हाल के वर्षों में तस्वीर तेजी से बदली है। जहां कभी नक्सली फरमान चलता था, वहां अब सुरक्षाबलों के नए कैंप, सड़कें और पुल-पुलिया बन रही हैं। नारायणपुर पुलिस के मुताबिक ‘माड़ बचाओ’ अभियान का मकसद सिर्फ नक्सलियों को खत्म करना नहीं, बल्कि शासन की योजनाओं को अंतिम गांव तक पहुंचाना है। शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय ग्रामीणों का भरोसा नक्सलियों से हटकर प्रशासन की ओर बढ़ा है। यही वजह है कि नक्सलियों की पकड़ लगातार कमजोर होती जा रही है।

नक्सल मुक्त बस्तर की ओर कदम
भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार की रणनीति अब स्पष्ट है- बस्तर को नक्सल मुक्त बनाना। इसी के तहत अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में लगातार सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में यहां विकास की रफ्तार और तेज होगी। फरसगांव में नक्सली स्मारक का ध्वस्तीकरण इसी बदलते अबूझमाड़ की तस्वीर है- जहां अब बंदूक नहीं, विकास की मौजूदगी दिखाई दे रही है। अबूझमाड़ में नक्सलियों की जमीन खिसक रही है और सुरक्षाबल निर्णायक बढ़त बना चुके हैं।

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