गोपी कश्यप- नगरी। धर्म और आस्था के प्रतीक गौवंश के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार के खिलाफ अब क्षेत्र में जनआक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। विकासखंड नरहरपुर के ग्राम मुसुरपुटा में संचालित साप्ताहिक मवेशी बाजार को लेकर श्री श्रींगी ऋषि गौशाला जीव रक्षक सेवा समिति ने कड़ा विरोध दर्ज करते हुए इसे तत्काल बंद कराने की मांग की है।
इस संबंध में समिति ने कांकेर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। समिति के अनुसार, मुसुरपुटा का यह मवेशी बाजार अब सामान्य व्यापारिक गतिविधि न रहकर गौवंश तस्करी का प्रमुख अड्डा बन चुका है। यहां बड़ी संख्या में बूढ़े, बीमार और कमजोर मवेशियों की खरीद-फरोख्त होती है, जिन्हें बाद में ओडिशा के नवांगर क्षेत्र के कत्लखानों में भेज दिया जाता है।
नगरी के मुसुरपुटा मवेशी बाजार पर गौवंश तस्करी और पशु क्रूरता के गंभीर आरोप लगे हैं। श्री श्रींगी ऋषि गौशाला समिति ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बाजार बंद करने की मांग की। @DhamtariDist #Chhattisgarh pic.twitter.com/ORELE6XVvl
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) April 2, 2026
जंगल मार्ग से अवैध परिवहन
समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि सिहावा क्षेत्र से बोराई के जंगल मार्ग का उपयोग कर मवेशियों को अवैध रूप से ओडिशा पहुंचाया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पशु क्रूरता, अवैध परिवहन और तस्करी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
नीलामी प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
हाल ही में ग्राम पंचायत मुसुरपुटा द्वारा इस मवेशी बाजार की नीलामी के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किया गया, जिस पर समिति ने कड़ी आपत्ति जताई है। समिति का कहना है कि इस प्रकार की प्रक्रिया संवेदनहीनता का परिचायक है और इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
कलेक्टर से करबद्ध प्रार्थना, आंदोलन की चेतावनी
समिति ने कलेक्टर से करबद्ध प्रार्थना करते हुए जनहित और जीव रक्षा के लिए इस बाजार को तत्काल बंद करने की मांग की है। ज्ञापन में अध्यक्ष प्रिंस गोलछा, कोषाध्यक्ष अनिल वाधवानी, सचिव श्रीमती अनीता जैन सहित कई पदाधिकारियों एवं हिंदू संगठनों के सदस्यों के नाम शामिल हैं। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि, यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।
प्रशासन की परीक्षा
01 अप्रैल 2026 को प्रशासन को यह शिकायत प्राप्त हो चुकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि, प्रशासन इस अत्यंत संवेदनशील और जनभावनाओं से जुड़े मुद्दे पर कितनी गंभीरता और तत्परता दिखाता है। गौमाता के संरक्षण का यह मुद्दा अब केवल एक समिति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था और भावनाओं से जुड़ चुका है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि, प्रशासन इस गंभीर विषय पर कितनी तत्परता और संवेदनशीलता दिखाता है।










