अंगेश हिरवानी- नगरी। छत्तीसगढ़ के नगरी में एक सड़क हादसे के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल उस समय खुल गई ,जब गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को उपचार के लिए लाए जाने पर सिविल अस्पताल बोरई में कोई भी डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं मिला। इलाज के अभाव में घायल की मौत होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में ही शव रखकर पूरी रात धरना-प्रदर्शन किया।
घटना रविवार देर रात की है। बोरई-घुटकेल मार्ग पर एक युवक मोटरसाइकिल सहित बेसुध हालत में सड़क पर पड़ा मिला। सूचना मिलते ही बोरई थाना पुलिस और ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां आपातकालीन सेवा ठप मिली। अस्पताल में न डॉक्टर, न नर्स और न ही प्राथमिक उपचार की कोई व्यवस्था उपलब्ध थी।
नगरी में सड़क हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल युवक को सिविल अस्पताल बोरई में इलाज नहीं मिल सका। ग्रामीणों ने डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ पर आरोप लगाए। @DhamtariDist #Chhattisgarh #Healthsystem pic.twitter.com/OsoIVlqTZc
— Haribhoomi (@Haribhoomi95271) February 16, 2026
घायल की बचाई जा सकती थी जान
स्थिति से आक्रोशित ग्रामीणों ने अस्पताल के मुख्य द्वार पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। उनका कहना है कि, यदि समय पर इलाज मिलता तो घायल की जान बचाई जा सकती थी। ग्रामीणों ने इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि 'प्रशासनिक असंवेदनशीलता' करार दिया है।
मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे
धरने का नेतृत्व कर रहे मनोज साक्षी ने कहा कि, जब सिविल अस्पताल में ही डॉक्टर नहीं मिलेंगे तो आम जनता कहां जाएगी? क्या यहां इमरजेंसी केवल कागजों में चलती है? उन्होंने बताया कि, संबंधित अधिकारियों को फोन पर सूचना दी गई, लेकिन मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा।
ज्ञापन और आंदोलन के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि, क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है। कई बार ज्ञापन और आंदोलन के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि जब तक अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती और जवाबदेही तय नहीं की जाती, आंदोलन जारी रहेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठे गंभीर सवाल
धरने में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल रहे। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि, इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसकी ठोस व्यवस्था की जाए।










