राहुल यादव- लोरमी। मुंगेली जिले के लोरमी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत झिरिया के जंगलों में 4 फारेस्ट गार्डों पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। घटना में सभी कर्मचारी बुरी तरह घायल हो गए—किसी का सिर फूट गया, तो किसी के हाथ-पैर में गंभीर चोटें आई हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए बिलासपुर भेजा गया है।
इलाज के लिए भेजे गए बिलासपुर
इस सनसनीखेज वारदात के बारे में मिली जानकारी के मुताबिक, चारों फारेस्ट गार्डों की यहां नई पदस्थापना हुई है। सूत्रों के अनुसार, वन विभाग की टीम इलाके में अवैध खनन की जांच करने पहुंची थी। इसी दौरान हालात अचानक बिगड़ गए और देखते ही देखते पूरा गांव कर्मचारियों पर टूट पड़ा। हमला इतना उग्र था कि, मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को तत्काल लोरमी के 50 बिस्तर अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बिलासपुर रेफर कर दिया गया है।

सबसे बड़ा सवाल
अगर वन विभाग की टीम अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करने गई थी, तो फिर ग्रामीण इतने आक्रामक क्यों हो गए? क्या टीम और गांववालों के बीच पहले से कोई विवाद था? और सबसे अहम—क्या इस घटना की पुलिस में रिपोर्ट दर्ज हुई है या नहीं?
रहस्य गहराया
पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कहीं यह सिर्फ अवैध खनन का मामला है या इसके पीछे कोई पुराना विवाद या गलतफहमी भी जुड़ी हुई है? फिलहाल, प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है, लेकिन घटना ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि, इस मामले में पुलिस क्या कार्रवाई करती है और असली वजह क्या निकलकर सामने आती है।
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