रामचिरत द्विवेदी- मनेन्द्रगढ़/पसौरी। छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ जिले के बरने नदी क्षेत्र में हुई सनसनीखेज हत्या का मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। घटना को 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक नामजद दो आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। हत्या जैसा गंभीर अपराध होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का विषय बन गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में स्पष्ट रूप से नामजद आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज है, फिर भी पुलिस उन्हें पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है। सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि पुलिस अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी? क्या यह लापरवाही है या फिर किसी दबाव में कार्रवाई को धीमा किया जा रहा है?
ऐसे शुरू हुई कई तरह की चर्चाएं
इधर, एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। मृतक के नाबालिग बेटे को पुलिस द्वारा कल सूरजपुर मनोचिकित्सक के पास ले जाया गया। इस कदम को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कहीं बयान बदलवाने की कोशिश तो नहीं की जा रही?
पुलिस से आम जनता का सवाल
हत्या जैसे जघन्य मामले में अब तक ठोस कार्रवाई का अभाव पुलिस की नीयत और कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है। आम जनता पूछ रही है कि, यदि नामजद आरोपी भी सुरक्षित घूम रहे हैं, तो कानून का खौफ आखिर किसे है?
मामला और भी गंभीर रूप ले रहा
सबसे बड़ा सवाल यही है कि, क्या बयान बदलने के बाद आरोपी बच निकलेंगे? या फिर पुलिस सच में उन्हें पकड़ने की इच्छाशक्ति रखती है? फिलहाल, जवाब का इंतजार है, लेकिन समय के साथ यह मामला और भी गंभीर रूप लेता जा रहा है।








